Interim Budget 2024 Analysis: पुरानी नीतियों को आगे बढ़ाने वाला बजट, चुनाव को लेकर आत्मविश्वास में दिखी सरकार

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Interim Budget 2024 Analysis: संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के द्वारा लोकसभा चुनाव पूर्व बजट पेश किया. इस बजट में सरकार ने ‘लोकलुभावन’ घोषणाओं से परहेज किया. वहीं, पहले की योजनाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है. इससे पहले करीब एक महीने पहले वित्त मंत्रालय के तरफ से ये इशारा किया गया था कि इस बजट में सरकार बड़ा नीतिगत फैसलों से परहेज करेगी. बिहार इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के अर्थशास्त्री व असोसिएट प्रोफेसर डॉ सुधांशु कुमार ने प्रभात खबर के साथ बातचीत करके अंतरिम बजट का विश्लेषण किया है. आइये जानते हैं.

वित्त ने रखी दस वर्षों की उपलब्धियां

वित्त मंत्री ने आर्थिक विकास के विभिन्न आयामों से जुड़े पूर्व की नीतियों को आगे भी को जारी रखने के भरपूर संकेत दिए हैं. चुनावी वर्ष में सत्ताधारी दल के आत्मविश्वास की झलक इस बजट में दिखी है. इस संबंध में लेखानुदान बजट में जो बाते कही गई हैं, वह हमारे बजट-पूर्व आकलन के बिलकुल अनुरूप है. जैसा की हमने कहा था की यह अंतरिम बजट वैश्विक अस्थिरता की पृष्ठभूमि में भी भारतीय अर्थव्यवस्था के उत्साहवर्धक उपलब्धियों के बीच प्रस्तुत है और राजनितिक रूप से मजबूत स्थिति में सत्ताधारी दल के लिए किसी भी तरह की लोक-लुभावन घोषणा अंतरिम बजट में करने की कोई मजबूरी नही है. इसी पृष्ठभूमि में वित्त मंत्री ने नई घोषणाओं की बजाये पिछले दस वर्षों में केंद्र सरकार की उपलब्धि का लेखा-जोखा पूरे जोर-शोर से प्रस्तुत किया है. बजट भाषण में आगामी चुनाव में उपयुक्त होने वाले मुद्दों की एक रूप-रेखा को भी प्रस्तुत कर दिया गया है. स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा अपनी सरकार की पिछले दस वर्षों की उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रस्तुत करेगी.

मोदी की चार जातियों पर फोकस

जैसा की हमने कहा था लोकप्रियता के पैमाने पर इस अंतरिम बजट का जोर प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेखित चार जातियों- युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों- को देश के आर्थिक विकास का अभिन्न अंग बनाने पर रहा है, ऐसा बजट भाषण में पूरा दिखा है. इस तरह समावेशी विकास को इंगित करने वाली दूरगामी सोंच की एक रूपरेखा की झलक प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है. इसके लिए जो एक ढांचा प्रस्तुत किया गया है उसका आधार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास रखा गया है. हमने कहा था की “चुनाव की निकटता को देखते हुए, इस अंतरिम बजट में बड़े नीतिगत बदलाव होने की संभावना तो नही है फिर भी, अंतरिम बजट की घोषणाओं के माध्यम से आर्थिक विकास को तेज गति से बढाने के लिए नीतिगत निरंतरता का संकेत देने की उम्मीद है.” वित्त मंत्री के भाषण का सार यही है. निवेश और उपभोक्ता मांग से संबंधित नीतियों में बार-बार परिवर्तन से एक अनिश्चितता की स्थिति आती है. ऐसे में जो संकेत बजट से निकल कर आ रहे हैं वह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जायेगा.

बजट का दर्शन

बजट का दर्शन अमृत काल में सबके प्रयासों से देश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की परिकल्पना पर आधारित है. इसके लिए सबसे मूलभूत आवश्यकता आधारभूत संरचना का निर्माण और नियमों की जटिलता में कमी आवश्यक माना जाता है. बजट ने संकेत दिए हैं की सरकार में वापस आने पर इस नीतिगत धारा पर आगे भी प्रयास होते रहेंगे. जैसा की हमने अपनी चर्चा में कहा था की पूंजीगत व्यय बढ़ाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और इसमें केंद्र ने पहले राज्यों को भी सुगम पूँजी की उपलब्धतता कराइ है. इस बजट में भी आशानुरूप राज्यों के पूंजीगत व्यय को बढ़ने के लिए ब्याजरहित 75000 करोड़ रुपये के कर्ज के प्रावधान किये गए हैं.

बजट भाषण का सारांश

संक्षेप में अगर देखें तो आर्थिक विकास पर वर्तमान सरकार के नीतिगत प्रयास राजकोषीय जिम्मेदारी की सीमा के भीतर रहते हुए पूंजीगत व्यय को लगातार बढाकर आधारभूत संरचना विकसित करने पर केंद्रित है. ऐसा विनिर्माण और सेवाओं में निरंतर वृद्धि के साथ ही रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है. हमने कहा था ‘जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए स्वच्छ-ऊर्जा क्षमता को विकसित करने पर भी ध्यान रखे जाने की उम्मीद है.’ इसकी झलक हाल ही में घोषित प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना में भी दिखी थी और आज के बजट में भी इस पर व्यापक चर्चा हुई है. राजस्व संग्रह में हुई वृद्धि का उपयोग केंद्र सरकार ने अपने राजकोषीय घाटे को लक्ष्य के भीतर रखने किया है और ऐस आगे भी जारी रखने की मंशा दिखाना शुभ संकेत है. गौर करें तो विभिन्न क्षेत्रों को सहयोग देने के साथ-साथ विभिन्न आय वर्गों के लोगों लिए केंद्र सरकार के प्रयासों को प्रमुखता से उजागर करने की कोशिश इस बजट में हुई है. तात्कालिक लाभ-हानि के हिसाब से बस इतना ही और कहा जा सकता है की मामूली परिवर्तन के साथ केंद्र सरकार से पूर्व से मिलने वाले योजनाओं के लाभ आगे भी मिलते रहेंगे.

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