Explainer : वोट बैंक बचाने के लिए दलित-आदिवासियों को रिझाती भाजपा?

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नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को सीधी पेशाब कांड के पीड़ित युवक दशमत रावत के पैर धोए और उससे माफी मांगी. चौहान ने कहा कि वह इस घटना से दुखी हैं. उन्होंने भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर फर्श पर बैठकर आदिवासी युवक दशमत रावत के पैर धोए. उन्होंने युवक को ‘सुदामा’ बुलाया और कहा, ‘दशमत, अब तुम मेरे मित्र हो.’ इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने दशमत रावत के साथ विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा की. खासकर, यह जानने के लिए कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उस तक पहुंच रहा है या नहीं. इससे पहले मुख्यमंत्री और आदिवासी युवक ने मिलकर यहां स्मार्ट सिटी पार्क में पौधारोपण किया.

नवंबर में हो सकता है मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव

सबसे बड़ी बात यह है कि शिवराज सिंह चौहान ने आदिवासी युवक दशमत रावत को सम्मानित सीधी पेशाब कांड को लेकर देशभर में मच रहे बवाल को शांत करने में कामयाबी हासिल तो की, लेकिन उन्होंने आदिवासियों के खिसकते वोट बैंक को साधने और बचाने में सबसे बड़ी सफलता हासिल की है. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो इस साल के नवंबर-दिसंबर में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. 13 दिसंबर, 2023 से पहले मध्य प्रदेश में 16वीं विधानसभा का गठन हो जाना है. राज्य में 15वीं विधानसभा का गठन 13 दिसंबर, 2018 को हुआ था. संभावना यह व्यक्त की जा रही है कि 20 से 30 नवंबर के बीच मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराया जा सकता है. ऐसे में, सीधी पेशाब कांड का असर किसी न किसी प्रकार से असर पड़ना लाजिमी था.

26 जनवरी, 2021 को सतना में छेदीकोल कौल घर पर भोजन किया

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दलित, आदिवासी और गरीबों के घर पर भोजन करने का इतिहास पुराना है. मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 26 जनवरी, 2021 को रीवा में आयोजित गणतंत्र दिवस के समारोह में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सतना जिले के दौरे पर पहुंचे. यहां पर मुख्यमंत्री ने सतना शहर के वार्ड नंबर-29 में रहने वाले प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही छेदीकोल कौल के घर पर दोपहर का भोजन किया. इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने छेदीलाल कौल के परिवार से मुलाकात कर उन्हें मिलने वाली सरकारी योजनाओं की जानकारी भी ली.

…जब धामना गांव में शिवराज ने दलित के घर किया भोजन

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मध्य प्रदेश में पहला ऐसा मामला नहीं है, जब शिवराज सिंह चौहान ने वोट बैंक साधने और बचाने के लिए दलित और आदिवासियों को रिझाया है. इससे पहले भी शिवराज सिंह चौहान कोरोना महामारी के दौरान 22 अक्टूबर, 2021 में मध्य प्रदेश के पृथ्वीपुर विधानसभा क्षेत्र के धामना गांव में एक दलित के घर भोजन किया था. उस समय पृथ्वीपुर विधानसभा में उपचुनाव होना था. यह सीट कांग्रेस के विधायक बृजेंद्र सिंह राठौड़ के निधन के बाद खाली हो गई थी. इस सीट से भाजपा ने शिशुपाल यादव को उम्मीदवार बनाया था और शिवराज सिंह चौहान उन्हीं का प्रचार करने गए थे.

गोरखपुर और बस्ती में योगी आदित्यनाथ ने किया भोजन

दलित आदिवासियों के घर पर अकेले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही भोजन नहीं खाते हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी राज्य में दलितों के घर भोजन करते हैं. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 14 जनवरी 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकर संक्रांति के अवसर पर गोरखपुर में झुमिया गेट के फर्टिलाइजर प्लांट के पास अमृत लाल भारती के घर पर भोजन किया. इसके बाद पांच मई, 2022 को बस्ती जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी बसंती और मनीराम के घर पहुंचकर दोपहर का भोजन किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्री समेत 15 लोगों के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाया था.

अमित शाह ने भी दलितों के घर किया भोजन

गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मई, 2016 को इलाहाबाद की रैली के बाद जोगियापुर गांव के निषाद बस्ती के गिरिजा प्रसाद बिंद के घर पर आयोजित ‘समरसता भोज’ में शामिल हुए थे. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमित शाह ने दलित के घर पर भोजन किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बिंद समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग में आता है. इसके बाद 24 जुलाई, 2017 को उन्होंने राजस्थान के जयपुर के सुशीलपुरा में दलित बूथ कार्यकर्ता रमेश पचारिया के घर पर भोजन किया. सबसे बड़ी बात तो यह है कि वर्ष 2017 के दौरान अमित शाह छह महीने में पांच बार देश के विभिन्न राज्यों में दलितों के घर भोजन किया. इसके बाद उन्होंने हरियाणा के रोहतक में भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ दलित परिवार के घर पर भोजन किया.

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