आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24: बिहार देश का सबसे तेजी से विकास करने वाला राज्य, 15.5% की दर से बढ़ रही अर्थव्यवस्था

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बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 : अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में बिहार देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य बन गया है. राज्य की अर्थव्यवस्था 15.5 फीसदी की दर से बढ़ रही है. वहीं, पिछले वर्ष की तुलना में प्रति व्यक्ति आय 13.9 प्रतिशत से बढ़कर 59, 637 होने का अनुमान है. सोमवार को उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने विधानमंडल के दोनों सदनों में 2023-24 की आर्थिक सर्वे पेश किया.

जीएसडीपी 7.5 लाख करोड़ होने का अनुमान

वित्त मंत्री ने कहा कि सीमित संसाधन होने के बावजूद राज्य इस विकास दर को प्राप्त किया है. वर्ष 2022–23 के लिए त्वरित अनुमान के अनुसार, वर्तमान मूल्य पर बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 15.5 फीसदी की दर से बढ़कर 7.5 लाख करोड़ होने का अनुमान है, जबकि वास्तविक सकल राज्य घरेलू उत्पाद 10.6 प्रतिशत बढ़कर 4.4 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है. वहीं प्रति व्यक्ति आय में 13.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी.

प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 59,637 रुपये होने का अनुमान

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक राज्य की प्रति व्यक्ति आय पिछले वर्ष की तुलना में 13.9% की बढ़ोतरी हुयी है और यह बढ़कर 59,637 रुपये होने का अनुमान है. यदि स्थिति मूल्य पर देखे तो यह वृद्धि करीब 9.0% है. यानी स्थिर मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 35,119 रुपये हो जाने का अनुमान है. वहीं, उपमुख्यमंत्री ने प्रति व्यक्ति ऋण के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राज्य में प्रति व्यक्ति ऋण वर्ष 2018-19 में 14438 रुपये थी जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 24357 रुपये हो गया है.

सामाजिक सेवाओं पर होने वाले खर्च बढ़कर हुआ 88,348 करोड़

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने अपने राजकोषीय संसाधानों को विवेकपूर्ण प्रबंधन से कई विकासमूलक लक्ष्य हासिल की है. पिछले सालों की तुलना में सरकारी व्यय में 20.1% की बढ़ोतरी हुयी है. वर्ष में 2022-23 में यह व्यय बढ़कर 231904 करोड़ हो गया है. राज्य सरकार अपने व्यय का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक सेवाओं पर खर्च करती है. वर्ष में 2022-23 में यह खर्च बढ़कर 88348 करोड़ हो गया है.

राज्य को अपना संसाधन बढ़ाना होगा

उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटा का उल्लेख किया और कहा कि इससे कंट्रोल करने की जरूरत है. राज्य के राजस्व का मुख्य साधन जीएसटी और वैट है. इसे बढ़ाने के लिये विभाग कार्य कर रहा है. इसके अतिरिक्त सभी विभागों को राजस्व बढ़ाने के लिये रणनीति बनाकर काम करना होगा. जिन विभागों से कर नहीं आ रहा है वहां से कर कैसे आये इसके लिये मॉडल बनाना होगा.

राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के अंदर

वित्त विभाग के प्रधान सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने राजकोषीय घाटा को लेकर कहा कि यह एफआरबीएम एक्ट के तहत निर्धारित सीमा के अंदर में है. राजकोषीय घाटे में जो वृद्धि अभी दिख रही है वह केंद्र सरकार मिले ब्याज रहित ऋण के कारण है. मौके पर विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल और संयुक्त सचिव संजीव मित्तल आदि उपस्थित थे.

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