बिहार का भवानीपुर गांव- कभी गंडक ने गढ़ी थी समृद्धि की कहानी, अब उसी ने लिखी तबाही की तकदीर

0 98

पूर्वी चंपारण, नदियों के किनारे सभ्यताएं विकसित होती रही हैं। सदानीरा गंडक नदी ने भी बिहार के पूर्वी चंपांरण में स्थित संग्रामपुर प्रखंड के भवानीपुर गांव को इसी तर्ज पर समृद्ध होने में मदद की । इस गांव की ख्याति न सिर्फ जिले, राज्य व देश में फैली। मगर, इसपर किसी की नजर लग गई। जिस गंडक नदी ने समृद्धि की गाथा लिखी, उसी ने बर्बादी की दास्‍तान भी लिख डाली है। इस साल की बाढ़ ने तो लोगों के समक्ष आवास व भोजन तक की बड़ी समस्या खड़ी कर कर दी है। बाढ़ के कारण हजारों जिंदगियां परेशान हैं।

शहरीकरण के वश में आकर गांव छोड़ने लगे

गंडक नदी की शनै:-शनै: बहती जलधारा के साथ जहाज से भवानीपुर के लोग पटना-कोलकाता तक अपना व्यापार करते थे। इस तरह यह गांव जिले के समृद्ध गांवों में शुमार हो गया। जब यहां व्यवसाय बढ़ा तो स्वभाविक तौर पर यहां के रहन-सहन व सोच-विचार में भी सकारात्मक परिवर्तन होने लगा। यहां के लोग अतीत में अपनी कर्मठता व विवेकशीलता से सफलता की बुलंदियां छूने लगे। यहां की शान-ओ-शौकत व व्यवसाय मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पटना व कोलकाता सहित कई अन्य महानगरों में प्रसिद्ध हो गया। मगर, धीर-धीरे लोग शहरीकरण के वश में आकर गांव छोड़ने लगे और यहां की समृद्धि उनके साथ ही यहां से निकलने लगी। 30 हजार की आबादी वाले इस गांव में इस बार आई बाढ़ बची-खुची समृद्धि को भी ले डूबी। लोगों के समक्ष आवास व भोजन तक की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। घर डूब गए, दुकानें धराशायी हो गईं। फसलें बर्बाद हो गईं। सड़कें जर्जर बन गई। हजारों जिंदगियां परेशान हैं।

 

40-50 वर्ष पूर्व तक पटना व कोलकाता से पानी जहाज से पहुंचता था सामान

भवानीपुर गांव के सामाजिक कार्यकर्ता राय सुंदरदेव शर्मा कहते हैं कि 40-50 वर्ष पूर्व तक पटना व कोलकाता से नाव व पानी जहाज द्वारा भवानीपुर घाट पर माल पहुंचता था। अगर, जहाज पटना लगा तो नाव से भवानीपुर सामान आता था। अन्यथा बहुत ऐसे व्यवसायी थे जो कोलकाता से नाव पर सामान लादकर गंडक होकर भवानीपुर पहुंचते थे। मगर, इस बाढ़ ने बची खुची समृद्धि को भी धो दिया। गांव में प्रतिदिन बाजार लगती थी। सोमवार व शुक्रवार को बड़ी साप्ताहिक बाजार लगती थी। इसमें खरीदारी के लिए लोग दूसरे जिले व राज्यों से भी आते थे। गांव के वयोवृद्ध हरिमोहन राय कहते हैं-बैलगाड़ी से सामान मोतिहारी जाता था। जेपी सेनानी व भवानीपुर निवासी राय सुंदरदेव शर्मा ने कहा कि गंडक ने जिस प्रकार की विनाशलीला की है उससे संभलने में किसी तरह छह माह से एक वर्ष तक लग सकते हैं। उन्होंने संग्रामपुर सहित पूरे जिले को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने केे साथ ही यहां के लिए स्पेशल पैकेज की मांग की।

 

वामपंथ का विजय रथ रोक पहली बार जलाया जनसंघ का दीपक

भवानीपुर के साथ एक दूसरी विडंबना भी रही। यहां के लोग शहरीकरण के आंधी में धीरे-धीरे यहां से पलायन करने लगे। इस कारण यहां का व्यवसाय जीवित तो रहा मगर, उसका विकेंद्रीकरण हो गया। कई लोग मोतिहारी, मुजफ्फरपुर व पटना में जाकर बस गए। मोतिहारी स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम गैस एजेंसी की मालकिन नीता शर्मा भी भवानीपुर की ही रहनेवाली हैं। उनके श्वसुर व भवानीपुर निवासी राय हरिशंकर शर्मा ने ही उस दौर में वामपंथी राजनीति को शिकस्त देकर चम्पारण में जनसंघ का पहला दीपक जलाया था। मोतिहारी के धनाढ्य कई होटल व प्रतिष्ठानों के मालिक यमुना प्रसाद भी यहां के रहनेवाले हैं। कभी वे यहां के मुखिया भी रहे। ऐसे कई लोग हैं जो मोतिहारी व भवानीपुर से संबंध रखे हुए हैं, जिनकी पहचान आज हर क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर कायम है।

 

भवानीपुर के रामायण ठाकुर ने बचाई थी अटल जी की जान

इस गांव की रूही शर्मा ने बताया कि बताया कि आज भले ही यहां चारों तरफ जनजीवन बाढ़ के पानी में डूबता-उतरता नजर आ रहा है, मगर उनके गांव का अतीत काफी गौरवशाली रहा है। यहां की मिट्टी की उर्जस्विता के कारण लोगों की ख्याति आज दूर-दूर तक नजर आ रही है। यहीं के रामायण ठाकुर ने देश के बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी जी की जान तक बचाई थी। इमरजेंसी के दौरान जब अटल जी मोतिहारी आए थे। तब उन्हें अचानक एक बैठक में भाग लेने जाना था। उस समय के विधायक राय हरिशंकर शर्मा ने उन्हें वहां तक जाने के लिए उनकी एंबेसडर चलाने के लिए भवानीपुर के रामायण ठाकुर को प्रतिनियुक्त किया। वे एक सेवानिवृत सेना के जवान के पुत्र थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जब पटना जा रहे थे, तब मोकामा घाट पुल पर गाड़ी का चक्का टूट गया। मगर, उन्होंने बहुत बहादुरी के साथ गाड़ी को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचा लिया। अटल जी को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचा दिया।

कभी समृद्ध रहे गांव में आज दिख रहा तबाही का मंजर

जिस समृद्धि पर भवानीपुर गांव इतराते नहीं थकता था आज वहां बर्बादी का मंजर है। गांव तक पहुंचनेवाली सड़कों की हालत ही सबकुछ बयां कर देती है। आतिथ्य सत्कार के लिए प्रसिद्ध इस गांव में फिलहाल बाढ़ के कारण लोगों के समक्ष आवास व भोजन तक की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई। खुद के आशियाने डूब गए हैं। बड़ी-बड़ी दुकानें धराशायी हो गईं। हजारों जिंदगियां परेशान हैं। अपना घर रहते हुए भी सड़़कों पर जीवन गुजारने को विवश हैं। गोदाम व दुकानों में पानी प्रवेश कर जाने से करोड़ों की क्षति हुई है। 1904 के बाद पहली बार 23 जुलाई की रात भवानीपुर निहालु टोला के पास चंपारण तटबंध का दस फीस कटाव कर लिया। अचानक बांध के टूटने से आई तबाही ने भवानीपुरवासियों को झकझोर कर रख दिया है।

116 वर्षों बाद आई ऐसी त्रासदी

आतिथ्य स्वीकार करने की परंपरा पूरे गांव में रही है। 40-50 लोग अचानक आ जाएं तो खिलाने में चंद मिनट लगते थे। क्योंकि भवानीपुर में आज की तरह मंडी बाढ़ के पूर्व तक कायम थी। आज घरों में रखा अनाज भी बह गया या घर में सड़ रहा है। गांव के नवलकिशोर ठाकुर, हरिमोहन राय कहते हैं कि क्या करे प्रकृति को यही मंजूर था। किसी की गलती नहीं है। 116 वर्षों बाद यह त्रासदी हमलोग झेल रहे हैं। उत्तरी भवानीपुर के चुटून कुमार, प्रदीप पटेल , विनेश्वर ठाकुर कहते हैं कि गांव में लगने वाला मंडी भी बंद हो गई है। हम लोग जाएं तो जाएं कहां। मेन रोड से संपर्क टूट चुका है। व्यवसाय चौपट हो गया है। बाढ़ से संग्रामपुर मार्केट, मंगलापुर, हुसैनी, डुमरिया पंचायत , सरोतर, श्यामपुर आदि दर्जनों गांव प्रभावित हुए हैं। जहां लोगों का एकमात्र सहारा बांध व सड़क है। मंगलापुर के अभिषेक सिंह ने बताया कि भवानीपुर को समृद्ध बनाने में सहायक रही गंडक नदी ने आज यहां बर्बाद की गाथा लिख दी है ।