Bharti Airtel इस बड़े टेलिकॉम कंपनी में खरीदेगी 97.1% हिस्सेदारी, शेयर में आया बड़ा उछाल

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Bharti Airtel: टेलिकॉम सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल भारती एयरटेल की सब्सिडियरी भारती एयरटेल सर्विसेज ने बीटल टेलीटेक (Beetel Teletech) कंपनी के अधिग्रहण की घोषणा की है. एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी की तरफ से बाजार को जानकारी देते हुए कहा गया है कि भारती एयरटेल लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी भारती एयरटेल सर्विसेज लिमिटेड ने भारती समूह की एक अन्य कंपनी में 97.1 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करते हुए 49,45,239 इक्विटी शेयरों के अधिग्रहण के लिए एक समझौता किया है. बीटेल टेलीटेक लिमिटेड, जिसकी दो विनिर्माण सुविधाओं वाले संयुक्त उद्यम में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले उत्पादों सहित दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों का उत्पादन करती है. पूरे अधिग्रहण की लागत ₹669 करोड़ आंकी जा रही है. कंपनी ने कहा है कि अधिग्रहण सरकार की मेक इन इंडिया की नीति के अनुरूप दूरसंचार उत्पादों को सक्षण करने और वितरण करने का हिस्सा है.

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उछल पड़ा एयरटेल का शेयर

भारतीय बाजार में आज सुस्ती देखने को मिल रही है. हालांकि, फिर भी भारती एयरटेल के बीटेल में हिस्सेदारी खरीदने की खबर के बाद कंपनी के शेयर में तेजी देखने को मिली. कंपनी के शेयर एक प्रतिशत से ज्यादा सुबह 10.20 मिनट पर उछलकर दिन के उच्चतम स्तर 1024.55 पर पहुंच गया. हालांकि, सुबह 11 बजे कंपनी के शेयर 0.63 यानी 6.40 अंकों की तेजी के साथ 1,019.45 पर कारोबार कर रहा था. पिछले छह महीने में भारती एयरटेल के शेयर ने निवेशकों को 15.96 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. जबकि, एक साल में निवेशकों ने 25.32 प्रतिशत का रिटर्न प्राप्त किया है.

क्या करती है बीटेल टेलीटेक

बीटल टेलीटेक की स्थापना 30 मार्च 1999 को हुई थी. कंपनी फिक्स्ड लैंडलाइन और मोबाइल एक्सेसरीज के लिए पेरिफेरल्स, नेटवर्क और एंटरप्राइज पर काम करती है. बीटेल अवाया, एचपी/पॉली, सैमसंग, सीमेंस, क्यूएससी, रेडविन, रूकस, रेड, एडीवीए और एक्टेलिस सहित कई प्रमुख ब्रांडों का वितरण करता है. बीटेल के पास एक संयुक्त उद्यम में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी भी है. इसमें लैंडलाइन, टेलीकॉम और नेटवर्किंग उत्पादों के निर्माण के लिए दो सुविधाएं हैं.

कैसे एक कंपनी दूसरे कंपनी का अधिग्रहण करती है

कंपनी एक दूसरी कंपनी का अधिग्रहण (मर्जर और अक्कर्ता) करने के लिए दोनों कंपनियों में पहले वार्ता होती है. अधिग्रहण की योजना बनाने के लिए दोनों कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स एक समझौते पर सहमत होते हैं. इसमें अधिग्रहण के विवरण, समयसीमा, सम्पत्ति का मूल्यांकन, स्टॉक मुद्रा आदि का समायोजन होता है. एक बार योजना बनने और समझौते के बाद, नौबत (फॉर्म 23C और फॉर्म 1 नौबत) जारी किया जाता है. इसमें अधिग्रहण की प्रक्रिया और विवरण शामिल होते हैं. नौबत जारी करने के बाद, उसे सर्वोच्च न्यायालय या नौबत स्वीकृति अधिकारी को प्रस्तुत किया जाता है. स्वीकृति प्राप्त करने के बाद, योजना के मुताबिक अधिग्रहण का कार्यान्वयन शुरू किया जाता है. इसमें एक कंपनी दूसरी कंपनी के सम्पत्ति, स्टॉक, और सम्पत्ति का नियंत्रण प्राप्त करती है. अधिग्रहण के बाद, दोनों कंपनियों के विभिन्न प्रक्रिया, उत्पादन, वित्त, और प्रबंधन की प्रणालियों को एकीकृत किया जाता है. विभिन्न विभाजित संरचना को एक समेकित और संगठित संरचना में बदला जाता है.

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