Ayodhya में बनने वाला श्रीराम मंदिर भारत की अस्मिता और गौरव का होगा प्रतीक

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के धन संकलन के लिए कार्यालय के उद्घाटन के दौरान सभी धर्मो के धर्मगुरुओं की बैठक मंगलवार शाम को आयोजित हुई। बैठक में धर्म गुरुओं ने कहा कि अयोध्या में बनने वाला श्रीराम मंदिर भारत की अस्मिता व गौरव का प्रतीक होगा। साथ ही लोगों के रुपये से बनने वाले इस मंदिर का अपना ही महत्व होगा, जिसे लोग भविष्य में याद करेंगे।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दिल्ली में सभी स्थानों पर कैंप कार्यालय बनाए गए हैं। इसके उद्घाटन के दौरान करोलबाग स्थित जैन मंदिर के जैनाचार्य एवं अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक डाक्टर लोकेश मुनी ने कहा कि उद्घाटन के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए निधि अर्पित करने वालों का तांता लग गया है। उन्होंने कहा कि यह देश को भारतीय संस्कृति और गौरव से जोड़ने का अभियान है। इसलिए सभी का इसमें योगदान आवश्यक है।

राष्ट्रपति से लेकर गरीब की झोपड़ी तक सभी को इससे जोड़ना है, जिससे जन-जन को यह महसूस होना चाहिए कि यह उनका मंदिर बन रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने यह निर्णय लिया है कि जनता के पैसे से मंदिर का निर्माण होगा। इसके लिए न तो विदेशी धन लिया जाएगा और न ही कारपोरेट घरानों से रुपये लिए जाएंगे।

इस अवसर पर झंडेवाला देवी मंदिर के प्रमुख स्वामी राजेश्वरा नंद ने कहा कि सभी भक्तों के सहयोग से मंदिर बनाने का यह फैसला ऐतिहासिक है, जिसमें अधिक से अधिक लोगों को अपना सहयोग देना चाहिए, जिससे ट्रस्ट को फंड की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। राम मंदिर को लेकर हुई बैठक में आचार्य विक्रमादित्य, बौद्ध भिक्षु लामा थुपतेन, सरदार इंद्रजीत सिंह ने मंदिर निर्माण को लेकर अपनी-अपनी बातें रखीं।