All India Rank: मिशन आइआइटी के संघर्ष को बयां करती फिल्म

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All India Rank: फिल्म ‘12वीं फेल’ के बाद अब आइआइटी की तैयारी करने वाले बच्चे के संघर्ष पर आधारित फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ इन दिनों सिनेमाघरों में देखी जा रही है. गीतकार, कवि और अभिनेता वरुण ग्रोवर ने बतौर निर्देशक इस फिल्म से हिंदी सिनेमा में कदम रखा है. इस फिल्म से कई नये चेहरे भी अपनी शुरुआत कर रहे हैं. इस फिल्म और उससे जुड़े खास पहलुओं पर वरुण ग्रोवर से उर्मिला कोरी की बातचीत पर आधारित है यह आलेख.

फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ की कहानी के लिए लिखे आठ ड्राफ्ट
फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ की कहानी लेखक वरुण ग्राेवर ने लिखी है. वे बताते हैं कि 2014 में जब मैंने इस फिल्म का पहला ड्राफ्ट लिखा था, तो उस वक्त ‘कोटा फैक्ट्री’ या कोई और दूसरा शो नहीं आया था. उसमें बच्चे की कहानी के साथ-साथ कोचिंग इंडस्ट्री पर सटायर भी था, पर धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि ये कहानी मेरे लिए बहुत पर्सनल है. मैं दो-तीन साल में इसमें बदलाव लाता रहा हूं और यह और पर्सनल होती चली गयी. वर्ष 2019 में जब मैंने श्रीराम राघवन को जो स्क्रिप्ट भेजी थी, वो फाइनल ड्राफ्ट था. इसके आठ ड्राफ्ट लिखे गये. आइआइटी पर ‘थ्री इडियट्स’ से लेकर ‘कोटा फैक्ट्री’ तक सभी में एक्स्प्लोर किया गया है. मगर मेरी जो फिल्म है, वह 17 साल के लड़के की कहानी है.उसकी दुनिया क्या है, उसके मां-बाप भी बेटे के साथ अलग-अलग तरह की परीक्षाएं दे रहे हैं. यह फिल्म इस अहम पहलू को भी उजागर करती है.

सेक्रेड गेम्स के दौरान वरुण ग्रोवर ने सीखा निर्देशन

वरुण बताते हैं कि मैंने मसान के बाद ही इस कहानी को लिख ली थी. उस वक्त मैंने सोचा कि क्या मैं भी डायरेक्टर बन सकता हूं? मैंने लिख तो लिया था, पर मेरे अंदर विश्वास नहीं था. मैंने निर्देशक नीतेश तिवारी को अप्रोच करना चाहा, पर नहीं गया. मुझे लगा कि ये कहानी मेरी है, तो मुझे खुद ही इसे कहनी चाहिए. इसी बीच सेक्रेड गेम्स आया, तो मैंने गंभीरतापूर्वक सोचना शुरू किया कि मैं सीख सकता हूं. सेक्रेड गेम्स में मैं शूट से जुड़ गया. मैंने अनुराग कश्यप, नीरज घेवान व विक्रमादित्य को काम करते देखा और उनसे सीखा.

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शशि भूषण और गीता के शानदार अभिनय ने फिल्म में दिलायी एंट्री

इस फिल्म की कास्टिंग में शशि भूषण और गीता अग्रवाल, बोधिसत्व यानी विवेक के माता-पिता बने हुए हैं. इस फिल्म की कास्टिंग की बात की जाये, तो इस जोड़ी का चुनाव तुरंत हो गया था. निर्देशक वरुण ग्रोवर बताते हैं कि शशि भूषण जी और गीता अग्रवाल का ऑडिशन सातवां था. उनका ऑडिशन देखने के बाद मैंने तय कर लिया कि फिल्म में लीड एक्टर के माता-पिता का रोल यही निभायेंगे. मैं बताना चाहूंगा कि फिल्म के वर्कशॉप में हैंडी कैम से इस जोड़ी का एक सीन शूट हुआ था. इतना शानदार परफॉरमेंस था कि सभी रोने लगे थे.

कास्ट में यूपी-बिहार के लहजे की थी जरूरत

फिल्म की कास्टिंग को लेकर वरुण धवन या स्टार किड्स के कास्ट करने की बात सामने आयी थी. इस पर वरुण ग्रोवर कहते हैं कि वो बस मन में ख्याल आया था. ईमानदारी से इस कहानी को कहना था, क्योंकि यह कहानी मेरे अंदर से निकली है. मैं यह फिल्म तभी ईमानदारी से बना सकता हूं, अगर मैं ये इंडस्ट्री के तामझाम भूल जाऊं! एक्टर को देखते हुए लगे कि उसी समय और उसी घर का लड़का है. कास्टिंग बे कंपनी ने ऑडिशन में बहुत मेहनत की है. हमने नियम बनाया कि हम मुंबई में ऑडिशन नहीं करेंगे, क्योंकि यहां सभी एक्टिंग सीख चुके हैं. हम ऐसे बच्चे चाहते थे, जो चेहरे से ही मासूम लगें. हमने दिल्ली, पटना, लखनऊ, जयपुर, कानपुर, कोलकाता में जाकर ऑडिशन लिया, क्योंकि हमें ऐसे ही बच्चे चाहिए थे, जिनमें मुंबई के बच्चों की तरह स्ट्रीट स्मार्टनेस न हो. हमें यूपी-बिहार का लहजा चाहिए था.

चालीस दिनों का था फिल्म की शूटिंग का शेड्यूल

वरुण बताते हैं कि फिल्म का काफी हिस्सा कोटा व लखनऊ में शूट हुआ है. लखनऊ में मां-बाप का घर है. कोचिंग का जितना हिस्सा है, एक कोटा में और दूसरा जयपुर में शूट हुआ है. कोचिंग के अंदर के सीन जयपुर के, बाहर के कोटा के हैं. बच्चों के हॉस्टल का सीन कोटा का है. तीनों शहर मिलाकर हमारा 40 दिनों का शूट था. हमने दो हिस्सों में शूट किया था. हमने शूटिंग की शुरुआत मार्च 2022 के अंत में किया था. कोटा और जयपुर में दूसरे हफ्ते ही तापमान 40 डिग्री के पार हो गया था, जिससे हमने 25 दिन ही शूट किया, बाकी की शूटिंग अक्तूबर में हुई.

पटना की समता सुदीक्षा और हजारीबाग के आयुष हैं अहम भूमिकाओं में

इस फिल्म की कास्टिंग, कास्टिंग बे कंपनी ने की है. काफी लंबा प्रोसेस रहा. छह महीने सिर्फ ऑडिशन चला था. निर्देशक और लेखक वरुण बताते हैं कि कहानी की जरूरत के अनुसार ही हमने एक्टर्स को चुना है. इस फिल्म की अभिनेत्री का किरदार पटना से है, जिसे समता सुदीक्षा कर रही हैं. उन्होंने पटना से ही ऑडिशन दिया था. रिंकू का किरदार आयुष पांडेय ने किया है, जो हजारीबाग से हैं. उसने अपने गांव से ही ऑडिशन का वीडियो बनाकर भेजा था. एक लड़का जौनपुर का है. फिल्म का लीड चेहरा बोधिसत्व दिल्ली से हैं. एक हजार बच्चों का ऑडिशन लेकर बोधि को चुना गया है. 500 लड़कियों में से समता को चुना गया था.

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