343 दिन बाद खुले स्कूल, बच्चों पर फूल बरसाकर शिक्षक बोले- आओ बच्चों, आपका स्वागत है

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School Reopen News : 343 दिन बाद सोमवार को प्राथमिक पाठशालाएं गुलजार हुईं। छात्रों व शिक्षकों के चेहरे पर खुशी तो परिसर में रौनक दिखी। स्कूलों को फूलों, गुब्बारों और झंडियों से सजाया गया था। उत्सव जैसे माहौल में शिक्षक-शिक्षिकाएं गेट पर ही कुमकुम की थाली और फूल लिए खड़े थे। विद्यालय आने वाले बच्चों का तिलक कर पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया। इसके बाद पहले दिन का शिक्षण कार्य शुरू हुआ। शासन की गाइडलाइन के अनुसार सोमवार को कक्षा एक और पांचवीं के छात्रों को ही बुलाया गया।

पहले ही जारी किया गया था शासनादेश

22 मार्च 2020 को जिले के सभी स्कूल बंद हुए थे। इसके बाद कक्षा छह से 12वीं तक के स्कूल खोल दिए गए, लेकिन पांचवीं तक के स्कूल अब तक नहीं खुले थे। पूर्व दिशानिर्देशों के अनुसार सोमवार से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए भी स्कूल खुल गए। महानिदेशक स्कूल एवं शिक्षा विजय किरण आंनद के आदेश के अनुसार बच्चों को अच्छा माहौल देने के लिए स्कूलों को सजाया गया था और बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले से एकदम अलग माहौल रहा।

निजी और सीबीएसई स्कूल में भी चहल-पहल

सीबीएसई के ज्यादातर स्कूलों में परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं। नर्सरी से पांचवीं तक के बच्चों की परीक्षाएं पूरी तरह से ऑनलाइन ही कराई जा रही हैं। ऐसे में ज्यादातर स्कूलों में छोटी क्लास के बच्चों को नहीं बुलाया गया था। वहीं हंिदूी मीडियम प्राइवेट स्कूलों में बच्चे पहुंचे। पहले दिन उम्मीद के अनुसार संख्या नहीं रही, लेकिन बच्चों के आने से चहल-पहल खूब रही।

बदले-बदले दिखे स्कूल

कोरोना काल के दौरान कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों का सुंदरीकरण कराया गया। ऐसे में इन 11 माह के अंदर स्कूलों की रंगत बदल गई। पीली दीवारों और टूटे फर्श पर बैठने वाले बच्चे सोमवार को जब स्कूल पहुंचे तो स्कूलों में लगी टाइल्स व रंग-बिरंगी पेंटिंग्स देखकर खुश हुए।

कई दिन बाद स्कूल आकर अच्छा लगा। शिक्षकों ने फूल बरसाए टीका किया। – सलोनी


स्कूल खुलने का कई दिनों से इंतजार कर रहे थे। स्कूल आकर अच्छा लगा। – आदित्य

एक साल बाद स्कूल आए हैं। यहां बहुत अच्छा लगा। स्कूल एकदम बदल गए। – नैंसी

शिक्षकों ने छुट्टी के दिनों के बारे में पूछा और खेल के साथ खूब बातें भी कीं। – कोमल


आओ बच्चों, आपका स्वागत है

शहर के प्राथमिक विद्यालय जसौली, प्राथमिक विद्यालय भरतौल, फतेहगंज पश्चिमी के कुरतरा, प्राथमिक विद्यालय बिचपुरी आदि कई विद्यालयों में शिक्षक गेट पर ही छात्रों का इंतजार कर रहे थे। शिक्षक अमर द्विवेदी, शैलजा, आनंद जायसवाल, सतेंद्र पाल सिंह आदि ने बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया।

कई महीने बाद फिर दिखे शारीरिक दूरी वाले गोले


कोरोना संक्रमण की शुरुआत के बाद जब बाजार खुलने की अनुमति दी गई थी, तो गोले बनाकर दूरी बनाई गई थी। इसके बाद यह गोले गायब हो गए थे। सोमवार को स्कूल खुले तो प्रार्थना सभा आदि के लिए मैदान पर गोले बनाए गए। छात्र-छात्रओं ने इसमें खड़े होकर प्रार्थना की।

नाचे, गाए व खूब खेले बच्चे

विद्यालयों में बच्चों का स्वागत हुआ। शिक्षकों ने उनसे बातचीत की। इसके बाद वह नाचना, गाना, खेलना जो चाहते थे, उसकी छूटी दी गई। कई बच्चों ने गायन, नृत्य आदि में प्रतिभा भी दिखाई। स्कूलों में बने सेल्फी प्वाइंट पर शिक्षकों ने बच्चों को खड़े कर फोटो भी खींचे।


बच्चों से जाने कोरोना काल के अनुभव

स्वागत के बाद जब बच्चे अपनी कक्षाओं में गए तो वहां शिक्षक ने सवालों की जगह उनके हालचाल पूछे। पूछा कि कोरोना काल में क्या किया। वह जो चाहते थे, उन्हें मिला या नहीं। गांव में कैसे हालात थे? उन्होंने कोविड के दौरान मास्क, दो गज दूरी, हाथ धोना आदि कोरोना के नियमों को कितना समझा? बच्चों ने शिक्षकों के साथ अपने अनुभव साझा किए।