26 जनवरी की हिंसा के बाद सिंघु बॉर्डर पर अब अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं प्रदर्शनकारी

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दिल्ली की तरफ सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों का उत्साह अब ठंडा पड़ने लगा है। धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। अहम बात यह है कि सप्ताहांत पर रविवार को पंजाब, हरियाणा आदि से जुटने वाली प्रदर्शनकारियों व समर्थकों की भीड़ भी नदारद दिखाई देती है। धरना स्थल खाली -खाली नजर आता है और अब उनकी संख्या घटकर इतनी रह गई है कि उन्हें अंगुलियों पर भी गिना जा सकता है। प्रदर्शनकारियों की लगातार कम हो रही संख्या से नेतृत्व करने वाले लोग भी हतोत्साहित दिखते हैं। यहां सतनाम सिंह पन्नू व सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब की ओर से धरना दिया जा रहा है। उधर, प्रदर्शनकारियों की घटती संख्या को देखते हुए सिंघु बॉर्डर पर पुलिस व सुरक्षा बलों के जवानों की संख्या भी कम कर दी गई है।


दरअसल, गणतंत्र दिवस पर राजधानी में हुए उपद्रव के बाद से ही आंदोलन की जड़े हिलने लगी थीं । हालांकि गाजीपुर बार्डर पर राकेश टिकैत के आंसू बहाने के बाद प्रदर्शनकारियों में उत्पन्न सहानूभूति ने घटती भीड़ को तब थाम लिया था, लेकिन इसका भी असर भी ज्यादा दिनों तक नहीं रहा था और धरना स्थल पर वापस लौटे प्रदर्शनकारियों का पलायन शुरू हो गया था। तब से उनका पलायन लगातार जारी है।

प्रदर्शनकारियों की घटती संख्या के पीछे उपद्रव के बाद नेतृत्वकर्ताओं में आपसी मतभेद को भी माना जा रहा है। नेतृत्वकर्ताओं को यह मतभेद मंच पर भाषण के दौरान भी खुल कर सामने आने से धरने पर बैठे लोगों को निराशा होने लगी है। मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि सिंघु बॉर्डर को भी बुराड़ी मैदान की तरह खाली कराया जा सकता है। पुलवामा के शहीदों को दी श्रद्धांजलि रविवार को सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों ने पुलवामा के शहीदों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए और उन्होंने मंच के पास सड़क पर ही कैंडल जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन के दौरान मौत के शिकार हुए लोगों को भी याद किया।