2000 के नोट सर्कुलेशन से बाहर होने के बाद अचानक क्यों बढ़ी सोने-चांदी की मांग, पेट्रोल पंप पर भी भीड़!

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भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार 19 मई को 2000 के नोटों को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी. जिसके बाद से लोगों में थोड़ी खलबली तेज हो गयी है. अपने पास रखे 2000 के नोट को खपाने के कई उपाय सोच रहे हैं. हालांकि आरबीआई ने साफ कर दिया है कि 23 मई से 30 सितंबर तक लोग आसानी से 2000 के नोट को बैंकों में भंजा सकते हैं. उसे बदल सकते हैं. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी कहा, 2000 के नोट को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, 4 महीने का समय दिया गया है कोई जल्दबाजी की जरूरत नहीं है इसलिए आप आराम से बैंक जाए और 2000 रुपए बदले.

2000 को सर्कुलेशन से बाहर कर दिया जाने के बाद अचानक बढ़ी सोनी की मांग

2000 के नोट के सर्कुलेशन से बाहर होने की घोषणा के साथ ही सोने की मांग अचानक बढ़ गयी है. सर्राफा बाजार में लोगों की भीड़ बढ़ गयी है. दरअसल 2000 के नोट सर्कुलेशन से भले ही बाहर हो गये हैं, लेकिन यह अब भी लीगल टेंडर है. बाजार में लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसी को देखते हुए लोग सर्राफा बाजार में इसे खपाने में लगे हैं. नोटों को जल्दी से खर्च करने के लिए लोग सोने, एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसी घरेलू वस्तुओं को खरीद में लग गये हैं. एक अर्थशास्त्री अंकिता पाठक ने ब्लूमबर्ग टेलीविजन के साथ एक बातचीत में कहा, इससे विकास में थोड़ी मदद मिलने की उम्मीद है क्योंकि खपत बढ़ने की उम्मीद है.

पेट्रोल पंप पर भी बढ़ गयी अचानक भीड़

पीटीआई की खबर के अनुसार लोग पेट्रोल पंप में 2000 के नोट बदलवाने के लिए पहुंच रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल पंप पर 2000 के नोट से भुगतान करीब पांच गुना बढ़ गया है. इंदौर पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार पेट्रोल पंप पर हाल के दिनों में 2000 रुपये के नोट से भुगतान में तेजी आयी है.

2,000 रुपये के नोट को बदलने के लिए किसी फॉर्म, पहचान पत्र की जरूरत नहीं

चलन से वापस लिए गए 2,000 रुपये के अधिकतम 10 नोटों (कुल 20,000 रुपये) को बदलने के लिए किसी फॉर्म या पहचान पत्र की जरूरत नहीं है. इन नोटों को बैंक खातों में जमा करने या बदलने के लिए जनता को 30 सितंबर तक का समय दिया गया.

2016 के नोट बंदी से कितना अलग है 2000 के नोट बंद

2000 रुपये के नोटों को सर्कुलेशन से वापस लेने की घोषणा के बाद भी 30 सितंबर तक वैध मुद्रा बना रहेगा, जबकि नवंबर, 2016 की नोटबंदी में 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों को रातोंरात अमान्य कर दिया गया था.

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