हरियाणा के मेवात में 103 गांव हुए हिंदू विहीन, अब सुप्रीम कोर्ट में उठा हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा

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सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर हुई है, जिसमें हरियाणा स्थित मेवात के नूंह में हिंदुओं की दयनीय दशा, उन पर अत्याचार और जबरन धर्मातरण का मुद्दा उठाते हुए मामले की सीबीआइ या एनआइए से जांच कराए जाने की मांग की गई है। यह याचिका लखनऊ की वकील रंजना अग्निहोत्री, करुणोश शुक्ला सहित पांच लोगों ने दाखिल की है।

वकील विष्णु शंकर जैन के जरिये दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एसआइटी से जांच की मांग की गई है। यह भी कहा गया है कि इसमें पुलिस, स्थानीय प्रशासन और तैनात अधिकारियों के ढीले रवैये और भूमिका भी देखी जाए। केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह नूह-मेवात में नागरिकों के जानमाल की सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती करे।

याचिका में मांग की गई है कि सरकार को आदेश दिया जाए कि वह हिंदुओं को वापस उनकी संपत्ति पर पुनर्वासित करे। पिछले 10 वर्षों में हिंदुओं की संपत्ति की मुसलमानों के पक्ष में जबर्दस्ती या दबाव में कराई गई सभी सेल डीड शून्य घोषित की जाए। पीड़ितों द्वारा हत्या, दुष्कर्म, घर में जबरन घुसने आदि से संबंधित एफआइआर की जांच कराई जाए और पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाए।

याचिका में मुस्लिम बहुल नूंह में हिंदुओं पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि वहां हंिदूुओं का जीवन और धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस नाकाम है। 2011 की जनगणना के अनुसार, हिंदुओं की जनसंख्या 20 फीसद से घटकर 10 से 11 फीसद रह गई है। बहुत से हंिदूुओं का जबरन इस्लाम में धर्मातरण कराया गया।

याचिका में कहा गया है कि गत 31 मई को चार सदस्यीय कमेटी ने नूंह के विभिन्न ग्रामवासियों से बात की और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में एक जून को हरियाणा के मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसमें गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं और कई घटनाओं का जिक्र किया गया है। याचिका में कहा गया है कि मेवात-नूंह में लगभग 431 गांव हैं, जिनमें से 103 गांवों में कोई हिंदू नहीं हैं। 82 गांवों में गिने-चुने हिंदू परिवार बचे हैं। वहां बहुत से हिंदुओं को घर छोड़ना पड़ा है।