हिमाचल के इन पहाड़ों से निकलता है नीला सोना, अंग्रेजी हुकूमत से भी पहले से चल रहा कारोबार, पढ़ें पूरा मामला

0 96


अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण ही खनियारा गांव प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि इस गांव की एक अौर खासियत है, जो इसे अन्य गांवों से अलग करती है। अंग्रेजी हुकूमत के वक्‍त से पहले से यह गांव क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख कारण रहा है। यही नहीं सिर छुपाने के लिए जब भी कोई छत बनाता था तो इस गांव का चक्कर जरूर लगाना पड़ता था। दरअसल इस गांव में स्लेट की खान हैं अौर पहाड़ पर कई लोगों की खान हैं, जहां पर ग्रामीण खनन करके स्लेट निकालते हैं। इसे नीला सोना भी कहा जाता है। स्लेट के कारीगर, मजदूर, घोड़ा व खच्चर वालों सहित नेपाल तक के लोग यहां पर अाकर रोजगार पा रहे थे। लेकिन अब उस स्तर पर यहां स्लेट नहीं निकाले जाते जो पहले कारोबार था। उसके मुकाबले यह कारोबार काफी कम हो गया है।

625 के मुकाबले 25 हेक्टेयर पर होता है काम

पहले 625 हेक्टेयर पर स्लेट निकालने का कारोबार चलता था। लेकिन अब सिर्फ 25 हेक्टेयर में ही स्लेट निकालने की अनुमति है। वैज्ञानिक तरीके से स्लेट निकालने के लिए भू विज्ञानियों की हिदायत की पालना हो रही है। पहले के मुकाबले कम हुए कारोबार से न केवल अासपास के लोगों का ही रोजगार छिना है, बल्कि इस गांव के जो पुराने ठेकेदार व लोग थे उन्होंने भी अपना पेशा बदल लिया है। बहुत कम लोग ही अब स्लेट का काम कर पा रहे हैं।

बस बंद होने का कारण मोहन मीकिन लिमिटेड कसौली की निजी सड़क है।
गढ़खल गुनाई सड़क पर एक माह भी नहीं चल पाई सरकारी बस, सैंकड़ों लोग मायूस
यह भी पढ़ें

कारीगरों की कमी व कानूनी अड़चनें

कारीगरों की कमी व कानूनी अड़चनों के कारण लोगों ने अपना कारोबार बंद कर दिया है। पहले कुल्लू में अालू का सीजन लगाने के बाद वहां के घोड़ा व खच्चर मालिक यहां पर स्लेट ढोने का काम करते थे। लेकिन अब यहां कारोबार न होने से वह भी नहीं अा रहे।
स्लेट खानों के दम पर चलती थी ट्रक यूनियन

खनियारा की स्लेट खानों के दम पर फतेहपुर में ट्रक यूनियन चलती थी, जैसे जैसे कारोबार बंद हुअा यह ट्रक यूनियन भी बंद हो गई। किसी जमाने में यह ट्रक यूनियन प्रदेश में नंबर एक पर थी।

पुलिस व वन विभाग की के रेड के बाद बदला व्यवसाय

स्लेट कारोबार को पर्यावरण विभाग की इजाजत की बाधता के कारण पुलिस व वन विभाग की टीमों की दबिश रहती थी, जिस कारण लोगों को चालान व जुर्माना भुगतना पड़ता था, अब लोगों ने कारोबार ही कम कर दिया है।

नेपाल के लोग काला पहाड़ के नाम से जानते हैं इस जगह को

नेपाल के लोग इस जगह को काला पहाड़ के नाम से जानते हैं। जब भी कोई बेरोजगार वहां पर यहां अाने की बात करते थे तो उसके साथी उसे काला पहाड़ अाकर पैसा कमाने की सलाह देते थे। लेकिन अब यह काला पहाड़ बेरोजगारों को रोजगार नहीं दे पा रहा।