स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारत का कुल खर्च काफी कम, केंद्र व राज्य सरकारों को इसमें बढ़ोत्तरी करने की जरूरत: नीति आयोग के सदस्य

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नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने गुरुवार को कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत का कुल खर्च कम है और इस स्थिति को सुधारा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से प्राप्त अनुभव भी यह कहता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च बढ़ना चाहिए।

औद्योगिक संगठन सीआईआई द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारत का कुल खर्च कम है। इसमें सुधार लाना चाहिए।’

पॉल ने कहा, ‘साल 2018-19 में स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारत का खर्च जीडीपी का 1.5 फीसद रहा था। निश्चित रूप से स्वास्थ्य पर जीडीपी का 1.5 फीसद खर्च स्वीकार्य नहीं है, अच्छा नहीं है।’ उन्होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्वास्थ्य क्षेत्र पर जीडीपी का 7 से 8 फीसद खर्च होता है।


राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) दस्तावेज का हवाला देते हुए पॉल ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारत का खर्च 2025 तक 3 फीसद होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘हम सभी को केंद्र व राज्य दोनों सरकारों से स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च बढ़ाने की अपील करने की जरूरत है। कोरोना वायरस महामारी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का मौका है।’ कोरोनो वायरस महामारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों के समन्वय में पॉल भी एक प्रमुख अधिकारी है।


नीति आयोग के सदस्य (Niti Aayog member) पॉल ने आगे कहा कि सरकार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टार्गेट करना चाहिए और निजी क्षेत्र को द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवा में विस्तार की बहुत गुंजाइश है।’