सुरेश रैना एक बार फिर से मैदान पर उतरने को तैयार, इस टीम का करेंगे प्रतिनिधित्व

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले पूर्व भारतीय स्टार ऑलराउंडर सुरेश रैना जल्द ही मैदान पर खेलते दिखाई देंगे। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने पूर्व विश्व कप विजेता कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के साथ इस साल 15 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी। इसके बाद वह पारिवारिक कारणों से आइपीएल-13 में भी नहीं खेले थे और संयुक्त अरब अमीरात से वापस लौट आए थे।

इसके बाद से रैना के प्रशंसक सिर्फ यही जानना चाह रहे थे कि वह कब मैदान में उतरेंगे? दैनिक जागरण ने पहले ही बताया था कि रैना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया है लेकिन वह अभी घरेलू क्रिकेट खेलते रहेंगे। रैना शनिवार को कानपुर पहुंचेंगे और वहां उत्तर प्रदेश के शिविर में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही वह वहां पर 13 और 15 दिसंबर को अभ्यास मैच खेलेंगे। रैना ने दैनिक जागरण से कहा कि इस साल सैयद मुश्ताक अली टी-20 ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं उत्तर प्रदेश को एक और खिताब दिलाना चाहता हूं और उसके लिए पूरी मेहनत करूंगा। इसके बाद मेरा फोकस अगले साल होने वाले आइपीएल पर होगा।

रैना ने अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मुकाबला 14-17 दिसंबर को लखनऊ में झारखंड के खिलाफ खेला था। उन्होंने अपना आखिरी आइपीएल मैच 12 मई 2019 को मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेला था। यह फाइनल मुकाबला था। वह इस समय जम्मू-कश्मीर में छह क्रिकेट अकादमी खोलने में भी जुटे हैं। हाल में उन्होंने कश्मीर में जाकर बच्चों के ट्रायल भी लिए हैं। सूत्रों के अनुसार वह इस सत्र में सिर्फ सैयद मुश्ताक अली टी-20 ट्रॉफी ही खेलेंगे। फिलहाल उनका रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने का इरादा नहीं है।


इससे पहले रैना ने एक कार्यक्रम में बल्लेबाज के गेंदबाजी करने को लेकर कहा कि बल्लेबाज का गेंदबाजी करना और गेंदबाज का बल्लेबाजी करना काफी महत्वपूर्ण होता है, यह हमेशा टीम के लिए उपयोगी होता है। कप्तान के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण होता है कि कोई बल्लेबाज चार-पांच ओवर गेंदबाजी करे और रन गति पर अंकुश लगाए जिसके बाद आपके सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज दोबारा गेंदबाजी के लिए आएं। कामचलाऊ ऑफ स्पिन गेंदबाजी करने वाले 34 वर्षीय रैना ने कहा कि सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग जैसे दिग्गज बल्लेबाज नियमित रूप से गेंदबाजी करते थे जिससे टीम में संतुलन बनाने में मदद मिलती थी।