सिंघु बार्डर पर बच्चों में घोला जा रहा हिंसा का जहर, वीडियो भी वायरल कर रहे प्रदर्शनकारी

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कृषि कानूनों के विरोध के बहाने सिंघु बार्डर पर छोटे-छोटे बच्चों में हिंसा का जहर घोला जा रहा है। जिस उम्र में बच्चों को स्कूल जाना चाहिए, पढ़ाई करनी चाहिए, खेलना चाहिए, उस उम्र में मासूमों को आजादी, हिटलरशाही, तलवारें, लाठी चलाने, बदला लेने, बैरिकेड तोड़ने और गाली देने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी उन बच्चों की गाली देते हुए वीडियो बनाकर भी वायरल कर रहे हैं। उनको सिखाया जा रहा है कि यह कानून किसानों की जमीन छीनने के लिए बनाए गए हैं। उनके बहकावे में आकर छोटे-छोटे बच्चे इसे दिल से लगा बैठे हैं।

दरअसल, 100 दिन से कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारी धरना दे रहे हैं। यहां पर लोग अपने परिवार को लेकर पहुंच रहे हैं। यहां पर प्रदर्शनकारियों ने आतंकियों समेत ऐसे आपत्तिजनक पोस्टर लगा रखे हैं, जो बच्चों में ¨हसा का जहर घोल रहे हैं। यहां पर काफी ऐसे बच्चे भी पहुंच रहे हैं जो आसपास के रहने वाले हैं। उन पर भी इनके नारों का गलत असर पड़ रहा है।


बच्चे जो देखते हैं वही दोहराते हैं। इन बच्चों को यही बताया जा रहा है कि इन कानूनों की मदद से सरकार उनकी जमीन पर कब्जा कर लेगी और उन्हें गुलाम बना लेगी। ऐसे में बच्चों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है, वहीं मनोविज्ञानियों का कहना है कि बालमन बहुत ही कोमल होता है। उन्हें ऐसी हिंसक बातों से दूर रखना चाहिए।

आंदोलनकारियों ने साढ़े पांच घंटे बंद किया केएमपी-केजीपी


वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कृषि कानून के विरोध में आंदोलनकारियों ने शनिवार को केएमपी और केजीपी एक्सप्रेस-वे पर साढ़े पांच घंटे तक जाम लगाया गया। इससे सोनीपत, पलवल और गुरुग्राम में जाम की स्थिति देखी गई। सुबह साढ़े दस बजे ही हजारों आंदोलनकारी केएमपी और केजीपी पर पहुंचे और जीरो प्वाइंट पर जाम लगा दिया। इससे चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। आंदोलनकारियों का जाम पूर्व घोषित था, इसलिए पुलिस ने मुरथल और बहालगढ़ में दोनों हाईवे की ओर जाने वालों वाहनों को डायवर्ट कर दिया था।