सिंगर दिलजीत दोसांझ पहुंचे सिंघु बॉर्डर, किसानों का बढ़ा रहे उत्‍साह

0 97


3 केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली-यूपी-हरियाणा पर चल रहा हजारों किसानों का धरना-प्रदर्शन 9वें दिन में प्रवेश कर गया है। वहीं, राजस्थान से आ रहे किसानों को हरियाणा पुलिस ने रोक लिया है। इससे नाराज किसानों के सड़कों पर बैठने से गुरुग्राम-अलवर नेशनल हाईवे पर भीषण जाम लग गया है। सूचना पर मौके पर पुलिस बल पहुंच रहा है।

सिंगर और अभिनेता दिलजीत सिंह दोसांझ सिंघु सीमा पर किसानों का विरोध करते हुए संबोधित कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमारे पास केवल एक अनुरोध है कि इस केंद्र सरकार से। कृपया हमारे किसानों की मांगों को पूरा करें। सभी लोग यहां शांति से बैठे हैं और पूरा देश किसानों के साथ है।

किसान एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी बाली सिंह के नेतृत्व में कृषि कानून के विरोध में दिल्ली जंतर मंतर जा रहे किसानों को जीरो प्वाइंट से हिरासत में लिया गया। हिरासत में लेकर किसानों को सूरजपुर स्थित पुलिस लाइन भेजा गया। दनकौर से किसान नोएडा चिल्ला बार्डर की ओर से आ रहे थे। चिल्ला बार्डर पर भारतीय किसान यूनियन भानू को समर्थन देना था, लेकिन पुलिस ने इकोटेक मेट्रो स्टेशन के पास बैरिकेडिंग कर किसानों के काफिले को रोका, विरोध के बाद हिरासत में लिया।


यमुना एक्सप्रेस वे पर दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आ रहे किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि किसानों का ये समूह पुलिस बेरिकेड तोड़कर आगे बढ़ रहा था।


दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए यूपी गेट के पास गाजीपुर बॉर्डर को वाहन चालकों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। जो वाहन चालक यूपी गेट से दिल्ली आना चाह रहे हैं वो वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करते हुए दिल्ली की सीमा में प्रवेश कर सकते हैं। वाहन चालक अप्सरा बॉर्डर, डीएनडी और भौपुरा बॉर्डर से प्रवेश कर सकते हैं।
चिल्ला बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों को समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यकर्ता भी समर्थन देने पहुंचे हैं। सपा की ओर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सुनील चौधरी व सपा महानगर (ग्रामीण) अध्यक्ष रेशपाल अवाना भी धरना स्थल पहुंचे हैं। दोनों नेताओं का कहना है कि अगर किसानों की मांग पूरी नहीं होती तो सपा कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे।


दोपहर 2 बजे किसान संगठनों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच होने वाली बैठक से पहले दिल्ली के मंत्री गोपाल ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट किया है- पिछले 10 दिनों से किसान सड़को पर आन्दोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार सुनने को तैयार नहीं है। केंद्र सरकार टालमटोल करने की बजाय आज की बातचीत में किसानों की माँगों को पूरा करे।’


इस बीच शनिवार को दोपहर 2 बजे होने वाली किसानों और केंद्रीय मंत्रियों की बैठक से पहले पीएम मोदी के साथ हाई लेवल मीटिंग हुई। इसमें केंद्रीय मंत्री अमित शाह समेत कई अन्य नेता भी शामिल हुए। इस दौरान किसानों के आंदोलन से उपजे हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। मिली जानकारी के मुताबिक, इस अहम बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद रहे। इसके साथ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाई लेवल मीटिंग में शिरकत की।
इस बीच बैठक से पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अहम बयान दिया है कि दोपहर 2 बजे किसानों के साथ एक बैठक निर्धारित है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि किसान सकारात्मक सोचेंगे और अपना आंदोलन समाप्त करेंगे।


शनिवार को किसान आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का कुछ किसानों ने विरोध भी किया। यूपी गेट पर आंदोलन कर रहे किसानों ने कहा कि कांग्रेस के यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू केवल राजनीति करने पहुचे हैं। सत्ता में रहते हुए कांग्रेस सरकार ने भी किसानों के लिए कुछ नहीं किया। कुछ किसानों ने अजय कुमार के पहुंचने का विरोध भी किया।


वहीं, अजय कुमार लल्लू ने कहा कि पहले दिन से ही राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेश किसानों के समर्थन में है। कांग्रेस पार्टी हमेशा लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाती आई है। किसानों की समस्याएं संसद में भी उठाई जाएंगी। वहीं,
बता दें कि दिल्ली से सटे यूपी और हरियाणा के तकरीबन दर्जनभर बॉर्डर सील हैं, जिससे शनिवार को भी लोगों को आवाजाही में दिक्कत पेश आ रही है। शनिवार दोपहर में केंद्र सरकार के साथ कृषि कानूनों पर होने वाली बैठक पर किसान संयुक्त मोर्चा के प्रधान रामपाल सिंह ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई करके आएंगे, रोज-रोज बैठक नहीं होगी। शनिवार को बैठक में कोई और बात नहीं होगी, कानूनों को रद करने के लिए ही बात होगी।


कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी बाॅर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि केंंद्र सरकार बार-बार तारीख दे रही है, सभी संगठनों ने एकमत से फैसला लिया है कि शनिवार को बातचीत का आखिरी दिन है।


इस बीच शनिवार दोपहर तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर पिछले 2 महीने से चल रहे किसानों के आंदोलन का रास्ता निकालने के लिए शनिवार दोपहर में केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच 5वें दौर की बातचीत प्रस्तावित है।
वहीं, शुक्रवार शाम को किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों को पूरी तरह रद करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए आगामी 8 दिसंबर को भारत बंद की घोषणा की है। इसे देश व्यापी बंद बताया जा रहा है।


नोएडा सेक्टर-14 ए स्थित चिल्ली बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। यहां पर प्रदर्शन कर रहे किसानोें का कहना है कि अगर शनिवार दोपहर को होने वाले किसानों-नेताओं के बीच बैठक का नतीजा नहीं निकला तो फिर वे संसद का घेराव करेंगे।
वहीं, सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसानों के खाने के लिए लंगर की व्यवस्था की गई है। यहां पर खाने-पीने के साथ आराम करने का भी इंतजाम कर दिया गया है।

एनएच -24 पर गाजीपुर बॉर्डर (यूपी-दिल्ली बॉर्डर) गाजियाबाद से दिल्ली के लिए बंद कर दिया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने किसानों के विरोध के कारण यह मार्ग बंद किया है।
किसान संगठनों का कहना है कि वे तीनों कानूनों को रद करने पर ही आंदोलन को समाप्त करेंगे। उन्होंने देश के विभिन्न ट्रेड यूनियनों के भी समर्थन का दावा किया। मोर्चा के सदस्य व किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि गुरुवार को हुई बैठक में केंद्र सरकार ने नए कृषि कानूनों में बिजली व पराली को लेकर किए गए प्रावधानों को वापस लेने व न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनाने पर करीब-करीब सहमति दी है। लेकिन, हमने कहा है कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों को वापस ले।


यह किसानों का कार्यक्रम

5 दिसंबर को किसान देशभर में मोदी सरकार व कॉरपोरेट घरानों का पुलता फूंकेंगे।
7 दिसंबर को जिन लोगों को केंद्र सरकार से पुरस्कार मिले हैं, वे उसे वापस कर आंदोलन का समर्थन करेंगे।
8 दिसंबर को पूरा भारत बंद रहेगा।
उधर, भाकियू के हरियाणा अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार शनिवार को उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो वे आंदोलन तेज करेंगे। राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने आठ दिसंबर को भारत बंद की घोषणा का समर्थन किया है।