वैक्सीन के खर्च आकलन में जुटा वित्त मंत्रालय, बजट में हो सकता है प्रावधान

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कोरोना वैक्सीन के जल्द ही बाजार में आने की सुगबुगाहट को देखते हुए वित्त मंत्रालय इन दिनों वैक्सीन पर होने वाले सरकारी खर्च के आकलन में जुट गया है। टीकाकरण पर होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए मंत्रालय अगले वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में इस खर्च का प्रावधान कर सकता है। पिछले कुछ दिनों में वैक्सीन खर्च को लेकर वित्त मंत्रालय के सचिवों के बीच कई बैठकें भी हो चुकी हैं। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक कोरोना महामारी के कारण बढ़ रहे राजकोषीय घाटे के बावजूद वित्त मंत्रालय वैक्सीन पर होने वाले सभी प्रकार के व्यय को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस बात के संकेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी पहले भी दे चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक खर्च को पूरा करने के और भी कई ऐसे उपायों को तलाशा जा रहा है जिससे सरकार के खजाने पर कम से कम दबाव पड़े।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले कुछ सप्ताह में वैक्सीन आने की बात कही थी। वैक्सीन निर्माण के क्षेत्र की तीन अग्रणी कंपनियां फाइजर, भारत बायोटेक व एस्ट्राजेनेका ने भारत सरकार से टीकाकरण की अनुमति मांगी है जिस पर जल्द ही फैसला किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक अभी भारत में वैक्सीन की खरीदारी, उसके स्टोरेज व टीकाकरण पर होने वाले खर्च को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन वित्त मंत्रालय की तरफ से इन सभी कार्यो पर होने वाले खर्च का मोटा अनुमान लगाया जा रहा है और उसके आधार पर एक बजटीय प्रावधान तैयार किया जा सकता है।


इस साल स्वास्थ्य के मद में होने वाले बजटीय प्रावधान को भी दोगुना किया जा सकता है। ताकि टीकाकरण का काम किसी भी हाल में प्रभावित नहीं हो। सूत्रों के मुताबिक टीकाकरण की एक बार शुरुआत के बाद यह काम एक साल से अधिक समय तक चल सकता है, इसलिए वित्तीय व्यवस्था भी पूरे साल के लिए की जाएगी। मोटे अनुमान के मुताबिक 70 करोड़ लोगों को वैक्सीन की जरूरत हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक टीकाकरण की पूरी चेन पर होने वाले खर्च में राज्य सरकार व निजी कंपनियों की भी भूमिका होगी, लेकिन वैक्सीन पर होने वाले खर्च का रोडमैप केंद्र सरकार ही तैयार करेगी जिसमें वित्त मंत्रालय की अहम भूमिका होगी। यह भी संभव है कि राज्यों को टीकाकरण के लिए सरकार की तरफ से अलग से अनुदान दिए जाए जिसकी घोषणा बजट में हो सकती है।