वामपंथ की जकड़ से छूट स्वामी विवेकानंद के पथ पर जेएनयू बदलती तस्वीर

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति प्रो एम जगदीश अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले हैं। इन पांच वर्षो में शायद ही कोई ऐसा महीना रहा हो, जब जेएनयू सुíखयों में नहीं रहा हो। इन वर्षो में वामपंथ का विद्रूप चेहरा दुनिया ने देखा। किस तरह आतंकी अफजल का शहादत दिवस मनाया गया। भारत तेरे टुकड़े होंगे का नारा जेएनयू में गूंजा।

वामपंथ की छत्रछाया में कैसे महिषासुर का महिमामंडन हुआ। इन्हीं कारगुजारियों के चलते जेएनयू वामपंथ की बेड़ियों में छटपटाने लगा और अंतत बेड़ियां तोड़कर स्वामी विवेकानंद की राष्ट्रवाद की राह पर चल पड़ा। विवादों की वजह से चर्चा में रहने वाले जेएनयू में पिछले पांच वर्षो में कई सकारात्मक बातें हुईं। पहली बार यहां राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की महिला विंग बनी, पहली बार प्रशासनिक भवन पर गणतंत्र दिवस परेड हुई। जेएनयू ने तकनीक को गले लगाया और न केवल ऑनलाइन परीक्षा, बल्कि ऑनलाइन पढ़ाई भी शुरू की। शायद इसलिए भी नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ) में जेएनयू विश्वविद्यालय श्रेणी में दूसरा, जबकि केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रेणी में पहला स्थान पा सका।


शुरू हुआ मैनेजमेंट व एंटरप्रेन्योरशिप का युग :

शैक्षणिक गतिविधियों के लिए यहां विगत कुछ वर्ष बहुत महत्वपूर्ण थे। जेएनयू में प्रबंधन की पढ़ाई शुरू हुई। जेएनयू में अटल बिहारी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना हुई। एमबीए का पहला बैच 2019 से शुरू हुआ। पहले यह स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप था, बाद में इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया। पहली बार गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन : जुलाई, 2019 में जेएनयू में पहली बार एनसीसी की महिला विंग का गठन हुआ। जेएनयू की स्थापना के 50 साल बीत जाने के बाद पहली बार 2020 में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पर गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन हुआ, जिसमें एनसीसी से जुड़ी छात्रओं ने परेड किया।


प्राकृतिक आपदाओं पर शोध की शुरुआत :

इन्हीं वर्षो में जेएनयू में पहली बार प्राकृतिक आपदाओं पर शोध कार्य प्रारंभ हुआ। स्पेशल सेंटर फॉर डिजास्टर रिसर्च की स्थापना 2018 में हुई। 2019-20 शैक्षणिक सत्र से पढ़ाई शुरू हुई। पहले साल इस केंद्र में पांच प्रोफेसर, एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति हुई।चार दशक बाद दीक्षा समारोह का आयोजन : जेएनयू में चार दशकों के लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2018 में दूसरा दीक्षा समारोह हुआ। इसके बाद से लगातार दीक्षा समारोह आयोजित हो रहा है। 2020 में कोरोना काल में ऑनलाइन दीक्षा समारोह आयोजित हुआ, जिसमें 600 से अधिक पीएचडी छात्रों को डिग्री प्रदान की गई।


कोरोना व मलेरिया पर शोध :

जेएनयू पहले मानविकी विषयों में शोध के लिए जाना जाता था, लेकिन अब विज्ञान विषयों में शोध पर काफी बल दिया जाने लगा है। इसके परिणामस्वरूप मलेरिया से लेकर कोरोना आदि पर शोध प्रकाशित हुए। जेएनयू के विज्ञानियों ने कोरोना पर मौसम के प्रभावों का अध्ययन भी किया। मलेरिया के इलाज की नई तकनीक भी इजाद की, जिसके पेटेंट के लिए आवेदन किया जा चुका है।


ऑनलाइन पढ़ाई का नेतृत्व :

कोरोना काल में जेएनयू शिक्षकों ने अपने पाठ्यक्रमों का ऑडियो-वीडियो रिकार्ड कर छात्रों के लिए उपलब्ध कराया। वहीं, कई शिक्षकों के पाठ्यक्रम संबंधी वीडियो शिक्षा मंत्रलय के स्वयंप्रभा चैनल पर भी प्रसारित किए जा रहे हैं। प्रो. बीएस बालाजी ने क्रैश कोर्स की तर्ज पर लेक्चर तैयार किया। कोरोना काल में स्नातक और स्नातकोत्तर के 60 घंटे के लेक्चर को 20 घंटों में समेटकर वीडियो बनाया, जिसका स्वयंप्रभा चैनल पर प्रसारण भी हुआ। जेएनयू ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए स्नातकोत्तर के उन विषयों की पढ़ाई पूरी तरह से ऑनलाइन करने की योजना बनाई है, जिनमें प्रयोगशालाओं की आवश्यकता नहीं होती। इस बारे में अकादमिक परिषद की बैठक में चर्चा भी हुई। कोरोना काल में ऑनलाइन परीक्षा व पढ़ाई मील का पत्थर साबित हुई।


पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहन :

पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने के मकसद से पहली बार परिसर में साइकिल का इंतजाम किया गया ताकि छात्र आने-जाने के लिए साइकिल का प्रयोग करें।

स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा

जेएनयू परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगाने संबंधी पूर्व छात्रों की 15 साल पुरानी ख्वाहिश हाल ही में पूरी हुई। पूर्व छात्रों की मदद से जेएनयू परिसर में प्रतिमा स्थापित हुई, जिसका अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हुआ। कुलपति ने स्वामी विवेकानंद को युवाओं का प्रेरणास्नोत कहा। यही नहीं, अब जेएनयू स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर एक सप्ताह के समारोह का भी आयोजन करेगा।