लूडो बढ़ा रहा बच्चों में बोलने की क्षमता और पढ़ाई की इच्छा, टांगराईन स्कूल के प्रधानाध्यापक का एक और नया प्रयोग

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कोरोना काल की वजह से पढ़ाई से दूर हुए छात्रों को फिर से पढ़ाई की तरफ लाने के लिए झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला के ग्रामीण क्षेत्र के एक शिक्षक लूडो खेल के जरिए पढ़ाई को रोचक बना रहे हैं। पोटका का टांगराईन मध्य विद्यालय शिक्षा में नए प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है। इस बार भी यह नया प्रयोग इसी स्कूल के प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी ने किया है।

उन्होंने स्कूल परिसर के चबूतरे पर एक विशाल लूडो का निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि हम बच्चों में बोलने की क्षमता और पढ़ाई की इच्छा को बढ़ाने के लिए उन्हें लूडो खेल के जरिए पढ़ा रहे हैं। जमशेदपुर से 50 किलोमीटर दूर पोटका प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र में स्थित यह विद्यालय अपने अभिनव प्रयोगों के कारण पूरे जिले में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी ने बताया कि लॉकडाउन के बाद एक मार्च से आठवीं कक्षा की पढ़ाई शुरू हुई है। एक साल तक स्कूल बंद रहने के कारण बच्चों की उपस्थिति कम थी। लगातार प्रयास करने के बाद भी बच्चे अनुपस्थित रह रहे थे। उन्होंने बताया कि सुदूरवर्ती एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां के बच्चे अक्सर बोलने में हिचकिचाते हैं एवंकम बोलते हैं। इसलिए बच्चों में अभिव्यक्ति की क्षमता को बढ़ाने के लिए इस लूडो का प्रयोग किया गया।


खेलने के दौरान बच्चे करते लूडो में अंकित निर्देशों का पालन

बच्चे लूडो खेलने के दौरान लूडो में अंकित निर्देशों का पालन करते हैं। लूडो के हर डिब्बे में कुछ न कुछ संदेश लिखा हुआ है। मसलन जोर से हंसो, परिचय दो, कहानी सुनाओ , कविता सुनाओ, गांव के बारे में बताओ। जिस बॉक्स में लूडो की गोटी गिरती है, बच्चों को उसी के अनुसार बोलना पढ़ता है। या तो वे हंसते हैं या वे कविता या कहानी सुनाते हैं, या फिर अन्य निर्देशों का पालन करते हैं। इस प्रयास ने बच्चों की उपस्थिति को 95 प्रतिशत तक ला खड़ा कर दिया है। विद्यालय को पुराने टायर से आकर्षक ढंग से सजाया भी गया है।