लाकडाउन का एक साल: फिर से गर्द में छुप गया नीला आसमान

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अब साइबर सिटी के आसमान में तारे नहीं टिमटिमाते। नीला आसमान फिर से गर्द में छुप गया है। पेड़ों के पत्तों पर धूल जमी है। सड़कों पर पैदल निकलें तो सांस फूल जाती है। हर तरफ धूल का गुबार है। लाकडाउन भले ही डरावना रहा हो, मगर इस दौरान प्रकृति ने खुद को संवार लिया था। पहाड़ों और जंगल जैसी स्वच्छ हवा के लिए शिमला और मनाली जाने की जरूरत नहीं रही और लाकडाउन में साइबर सिटी की ही तस्वीर बदल गई। एक साल हो गया, फिर से वही हालात हो गए हैं। सड़कों पर वाहनों का दबाव फिर से बढ़ने से हवा जहरीली हो गई है। लाकडाउन के दौरान पीएम 2.5 प्रदूषण का स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से भी नीचे दर्ज किया जा रहा था। इन दिनों गुरुग्राम में प्रदूषण का स्तर 350 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के आसपास है। इसका मतलब ये कि हवा सामान्य से सात गुना जहरीली है। सूना हो गया था साइबर हब

लाकडाउन का एक साल: फिर से गर्द में छुप गया नीला आसमानसाइबर हब में आइटी कंपनियों सहित कई मल्टीनेशनल कंपनियों के दफ्तर हैं। लाकडाउन लगा तो साइबर हब की रौनक गायब हो गई। नौकरीपेशा लोग वर्क फ्राम होम यानी घरों से ही काम करने लगे। सड़कें भी सूनी हो गई। लेकिन अब फिर से रौनक लौट आई है। यहां पब-बार भी गुलजार हो गए हैं। सदर बाजार में लटके थे ताले

लाकडाउन में संक्रमण से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले इलाकों में सबसे पहले पाबंदी लगाई गई थी। राशन सहित घरेलू सामान की जरूरी दुकानों को छोड़कर सभी दुकानों पर ताले लटक गए थे। सदर बाजार में पांच सौ से ज्यादा बड़ी दुकानें हैं। अतिक्रमण के दौरान संकरी दिखने वाली सदर बाजार की गलियां कई फुट चौड़ी नजर आने लगीं। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि सदर बाजार में पैर रखने की भी जगह नहीं बची है।

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