लखनऊ में पुस्तक ‘स्वयं की आवाज’ का विमोचन: 1 लाख लोग पहुंचे कार्यक्रम में,गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

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लखनऊ14 मिनट पहले

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लखनऊ के रमाबाई रैली स्थल में रविवार को मशहूर लेखक, वक्ता और शांतिदूत प्रेम रावत की पुस्तक ‘स्वयं की आवाज’ का विमोचन हुआ। ये कार्यक्रम खास इसलिए रहा, क्योंकि इसमें करीब 1 लाख लोग पहुंचे। जिससे ये गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है।

शांतिदूत के नाम से मशहूर हैं प्रेम रावत
प्रेम रावत एक लेखक, वक्ता और मार्गदर्शक हैं। लेकिन वो शांतिदूत के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर हैं। वो 13 साल के थे, जब पहली बार किसी बड़े मंच से लोगों को शांति का पाठ सिखाया। प्रेम रावत यूनाइटेड नेशन समेत दुनिया के कई बड़े प्लेटफॉर्म पर अपना संबोधन दे चुके हैं। साथ ही दुनिया के हर कोने में पीस एजुकेशन प्रोग्राम चलाते हैं। वो दुनिया भर में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को भी जिंदगी और शांति का पाठ सिखाते हैं।

प्रेम रावत दुनिया भर में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को भी जिंदगी और शांति का पाठ सिखाते हैं। (इस फोटो में बॉलीवुड सेलेब भाग्यश्री भी नजर आ रही हैं।

प्रेम रावत दुनिया भर में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को भी जिंदगी और शांति का पाठ सिखाते हैं। (इस फोटो में बॉलीवुड सेलेब भाग्यश्री भी नजर आ रही हैं।

1 लाख लोग पहुंचे विमोचन कार्यक्रम में
रमाबाई मैदान में हुए इस कार्यक्रम में 1 लाख 14 हजार 704 लोग पहुंचे। जिससे कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में ये दर्ज हुआ। इस किताब का इंग्लिश एडिशन हेयर योरसेल्फ 2021 में न्यू यॉर्क में लॉन्च हुआ था। विमोचन के बाद प्रेम रावत ने पुस्तक का तीसरा अध्याय लोगों को पढ़कर सुनाया। जिसे सुनकर वहां मौजूद लोग उनके व्याख्यान में खो गए।

कार्यक्रम में एक लाख लोग पहुंचे, जिससे ये आंकड़ा गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया।

कार्यक्रम में एक लाख लोग पहुंचे, जिससे ये आंकड़ा गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया।

इसके बाद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा “शांति के अंदर सारे आशीर्वाद हैं पर उनमें शांति शामिल नहीं। शांति जब कहीं नहीं दिखाई देती फिर भी दिखती है। वो एक रोशनी की किरण की तरह है। हम एक ही समय में रह सकते हैं जो की ‘अब’ है।

संबोधन के बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री दस्सानी ने प्रेम रावत के साथ कुछ सवाल जवाब किए। जिसमें उन्होंने पूछा “स्वयं की आवाज पर ही ध्यान देने पर हम अपने आस–पास के लोगों पर कैसे ध्यान दे पाएंगे और कैसे उनके दुखों को मिटा पाएंगे”। प्रेम रावत ने जवाब में कहा “एक बुझा हुआ दीया दूसरे बुझे हुए दीयों को नहीं जला सकता है। उसी प्रकार जब तक हम स्वयं को नहीं जानते, तब तक हम दूसरों की परेशानियों से उबरने में उनकी सहायता नहीं कर पाएंगे”।

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