राजनीति में जाने की अटकलों पर सौरव दादा का कवर ड्राइव

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जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे ही भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एवं बीसीआइ अध्यक्ष सौरभ गांगुली के राजनीति में पर्दापण की अटकलें तेज होती जा रही हैं। पिछले कई दिनों से इस मसले को लेकर राजनीति का माहौल गरमाया हुआ है।

रविवार को गांगुली और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच हुई मुलाकात और इसके तुरंत बाद सोमवार को गांगुली का दिल्ली आकर उस कार्यक्रम में शिरकत करना, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी आए थे। इन मुलाकातों से अटकलों को और बल मिल रहा है। हालांकि अटकलों के इस मैदान पर दादा ने जबरदस्त ड्राइव खेली है। कार्यक्रम के बाद उन्होंने कहा कि अगर राज्यपाल आपको मुलाकात के लिए बुलाते हैं, तो जाना चाहिए। उनके निमंत्रण पर ही मिलने गया था।

सौरभ गांगुली ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट की। प्रतिमा का अनावरण कर अमित शाह निकल गए। इसके बाद सौरभ गांगुली को मीडिया ने घेर लिया। पहले अरुण जेटली को लेकर बात की, लेकिन जैसे ही राजनीति से संबंधित सवाल पूछे गए तो गांगुली ने चुप्पी साध ली और किसी तरह खुद को भीड़ से निकालकर स्टेडियम से बाहर चले गए। लेकिन कुछ ही पलों में वापस आ गए।


इसके बाद मीडिया ने फिर दादा की घेराबंदी कर ली, लेकिन राजनीति में जाने को लेकर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। किसी तरह बचकर गांगुली फिर से स्टेडियम से बाहर जाकर गाड़ी में बैठ गए। कुछ देर के बाद वे स्टेडियम में आए तो फिर उनको मीडिया कर्मियों ने फिर घेर लिया। सवाल एक ही था और दादा का जवाब भी चुप्पी ही थी। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि राज्यपाल के निमंत्रण पर जाना पड़ता है।


दिल्ली क्रिकेट के भीष्म पितामाह हैं बेदी

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने कहा कि पूर्व भारतीय स्पिनर बिशन सिंह बेदी दिल्ली क्रिकेट के भीष्म पितामाह हैं। उन्होंने गुजारिश करेंगे की स्टैंड से उनका नाम हटाने की मांग वापस ले लें। दरअसल स्टेडियम में अरुण जेटली की प्रतिमा स्थापित किए जाने से बेदी ने आपत्ति दर्ज कराई थी और अपना नाम स्टैंड से हटाने की मांग की थी। बेदी का तर्क है कि प्रतिमा स्थापित करनी ही है तो किसी दिग्गज खिलाड़ी की होनी चाहिए।