महामारी के बाद Health Insurance प्लान खरीदने के पैटर्न में आया अंतर, सर्वे से सामने आई जानकारी

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कोविड संकट के बाद हेल्थ इंश्योरेंस के मामले को लेकर कंज्यूमर बिहेवियर में आए बदलावों को समझने के लिए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने पूर्वी, पश्चिमी, उत्तर और दक्षिण भारत में एक सर्वे आयोजित किया। इस सर्वे में 248 लोगों सें बात की गई। इनमें से 177 लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस प्लान हैं, जबकि 77 लोगों के पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस प्लान नहीं है। आइए जानते है कि इस सर्वे से कौन-से तत्थ सामने निकलकर आए हैं।

उत्तरी भारत में किए गए सर्वे से पता चला कि कोविड के बाद हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदने के पैटर्न में मामूली अंतर आया है। सिर्फ 13 फीसदी ग्राहकों ने पिछले छह महीनों के दौरान कोई नई पॉलिसी खरीदी है। 57 फीसदी लोगों के पास जो हेल्थ इंश्योरेंस प्लान थे, वो एक साल पहले खरीदे गए थे। हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने में एजेंट ही प्राइमरी सोर्स थे। अर्थात ज्यादातर पॉलिसी उन्हीं के जरिये खरीदी गई थी। इसके बाद वेबसाइट के जरिये पॉलिसी खरीदी गई। वेबसाइट के जरिये 37 फीसदी पॉलिसी खरीदी गई।

सर्वे के दौरान यह भी पता चला कि इसमें शामिल लगभग आधे लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस का ब्रांड चुनने में मित्रों, परिवार और सहकर्मियों की सलाह पर भरोसा किया। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दी है।

उत्तरी क्षेत्र में सर्वे में जिन लोगों से सवाल पूछे गए उनमें से 90 फीसदी ने कहा कि उन्होंने इमरजेंसी में खर्चे की आशंकाओं को देखते हुए पॉलिसी ली। जीवनशैली में आ रहे बदलावों की वजह से पैदा हुई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करने के लिए पॉलिसी की जरूरत महसूस की गई। 59 फीसदी लोगों ने माना कि उन्हें जीवनशैली में परिवर्तन की वजह से पैदा होने वाली बीमारियों ने पॉलिसी खरीदने के लिए प्रेरित किया।


40 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने टैक्स बेनिफिट्स के लिए पॉलिसी खरीदी। पॉलिसी खरीदने के पीछे यह उनका प्राथमिक कारण था। मौजूदा कोविड संकट के देखते हुए सर्वे में शामिल 76 फीसदी पॉलिसीधारकों ने कहा कि वे अपनी पॉलिसी में सम एश्योर्ड बढ़वाना चाहेंगे।

जिन लोगों के पास इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं थी, उन्होंने बताया कि वित्तीय दिक्कतों और कंपनियों की ओर कराई जाने वाले कर्मचारी बीमा की वजह से उन्होंने पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस नहीं खरीदा है। हालांकि, सर्वे में शामिल 83 फीसदी लोगों को लगता है कि सिर्फ कर्मचारी बीमा के भरोसे रहना ठीक नहीं है। भविष्य में वो पर्सनल पॉलिसी लेना चाहते हैं।