मध्य प्रदेश में अब कोरोना महामारी हुई और भी ज्यादा गंभीर, भर्ती मरीजों में 20 से 25 फीसद आइसीयू में

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मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण की ताजा लहर में मरीजों की हालत गंभीर हो रही है। कोरोना से ज्यादा संक्रमित जिलों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, विदिशा आदि में 20 से 25 फीसद तक मरीज गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में हैं। कहीं- कहीं यह आंकड़ा ज्यादा भी है। 20 नवंबर की स्थिति में सरकारी या अनुबंधित कोविड अस्पतालों में भोपाल के 564 मरीजों में 126, इंदौर के 696 में 141, जबलपुर के 83 में 45, ग्वालियर के 173 में 50 मरीज आइसीयू में भर्ती थे।

कोविड-19 को लेकर प्रदेश सरकार के सलाहकार व हमीदिया अस्पताल के छाती व श्वास रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. लोकेंद्र दवे के मुताबिक पिछली बार करीब 40 फीसद मरीज लक्षण वाले थे, जबकि नई लहर में 70 फीसद लक्षण वाले हैं। इसकी बड़ी वजह कांटेक्ट ट्रेसिंग नहीं होने के कारण बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान ही नहीं हो पाना है। इस वजह से सिर्फ लक्षण वाले मरीज ही अस्पताल पहुंच रहे हैं। मरीजों के गंभीर होने का भी यही कारण है।


दूसरी वजह यह भी है कि ठंड में अस्थमा, क्रॉनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसआर्डर (COPD), एलर्जी समेत फेफड़े की कई बीमारियों के मरीज 30 फीसद तक बढ़ जाते हैं। इन मरीजों को कोरोना संक्रमण होने पर वे गंभीर हो रहे हैं।

आशंका: 25-26 नवंबर तक और बढ़ सकते हैं मरीज छाती व श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शर्मा बताते हैं कि दीपावली व धनतेरस के दौरान बाजार की भीड़ में जो लोग संक्रमित हुए होंगे, उन पर बीमारी का ठीक से असर 25-26 नवंबर तक दिखाई देगा।


डॉ. शर्मा ने बताया कि इस बार कई मरीज निमोनिया के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं और जांच में कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। हालांकि मरीज गंभीर हालत में आ रहे हैं, लेकिन यह राहत की बात है कि अभी मौत की दर पिछली लहर जैसी नहीं है।

इसलिए जरूरी है कांटेक्ट ट्रेसिंग

प्रदेश में अभी तक के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि कोरोना पीड़ित एक व्यक्ति करीब 10 लोगों को संक्रमित करता है। इनमें ज्यादातर लोग उसके पहले संपर्क वाले होते हैं। मार्च में प्रदेश में कोरोना की दस्तक के साथ ही मरीज के बताए अनुसार उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन करता था। घर-घर जाकर पहले संपर्क में आए लोगों की जांच करवाई जा रही थी। दो महीने पहले यह व्यवस्था प्रदेश भर में बंद कर दी गई। अब मरीजों की जिम्मेदारी है कि वह अपने संपर्क में आए लोगों को जांच के लिए फीवर क्लीनिक भेजे, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इस वजह से मरीजों की फौरन पहचान नहीं हो पा रही है।

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी ने बताया कि हमने फीवर क्लीनिक की संख्या बढ़ा दी है। मरीजों के घर के नजदीक यह सुविधा उपलब्ध है। हर जगह जांच हो रही है। लोगों में जागरूकता भी आ गई है, वे खुद जाकर जांच करा रहे हैं, इसलिए कांटेक्ट ट्रेसिंग बंद कर दी गई थी। अब लोगों को भी सतर्क रहना चाहिए और जो मरीजों के संपर्क में आए हैं, उन्हें खुद फीवर क्लीनिक जाकर जांच करवाना चाहिए।