बीस दिन पहले हुई थी शीर्ष एजेंसियों की मीटिंग, SFJ की प्लान पर हुई थी चर्चा; लाल किले की घटना का था अंदेशा

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26 जनवरी की घटना को लेकर इंटेलीजेंस की असफलता को लेकर राजनीतिक आवाजें उठाई जा रहीं हैं लेकिन सूत्रों का कहना है कि जनवरी के पहले सप्ताह में ही स्पेशल डायरेक्टर इंटेलीजेंस ब्यूरो की अध्यक्षता में पहली उच्चस्तरीय कोऑर्डिनेशन मीटिंग की गई थी। इसमें प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SJF) द्वारा लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने की मंशा का जिक्र भी हुआ और इसे रोकने के इंतजामों पर चर्चा की गई। इस बैठक में दिल्ली पुलिस के 8 शीर्ष अधिकारी , इंफॉर्मेशन ब्यूरो के 12 अधिकारियों के अलावा हरियाणा पुलिसी के भी वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे।

भारत में प्रतिबंधित संगठन SFJ ने कहा था कि सरकार की ओर से किसानों के ट्रैक्टर रैली को अनुमति दी जानी चाहिए वरना गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में हिंसा होगी तो इसकी जिम्मेदार सरकार होगी। अमेरिका में बनाए गए इस संगठन की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य पंजाब में अलग से खालिस्तान बनाने का है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संगठन पर राष्ट्रविरोधी कैंपेन चलाने का आरोप लगाया और UAPA एक्ट के तहत वर्ष 2019 में इसपर प्रतिबंध लगा दिया।


खालिस्तानी संगठन SFJ विदेश में बैठ कर कट्टरपंथी गतिविधियों का संचालन करता है। संगठन ने पहले ही लालकिला पर झंडा फहराने वाले को ढाई लाख अमेरिकी डॉलर और 1 फरवरी को संसद पर खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए साढ़े तीन लाख डॉलर देने का एलान किया था।