‘प्रबुद्ध भारत’ के 125वें वार्षिक समारोह को PM मोदी ने किया संबोधित, स्वामी विवेकानंद को किया याद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्वामी विवेकानंद द्वारा शुरू की गई रामकृष्ण आदेश की मासिक पत्रिका ‘प्रबुद्ध भारत’ के 125वीं वर्षगांठ समारोह को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड में मायावटी स्थित अद्वैत आश्रम द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम को संबोधिक करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद को याद किया।

पीएम मोदी ने प्रबुद्ध पत्रिका की 125वीं वर्षगांठ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने हमारे राष्ट्र की भावना को प्रकट करने के लिए इस पत्रिका का नाम प्रबुद्ध भारत रखा। वह जागृत भारत बनाना चाहता था। जो लोग भारत को समझते हैं, वे जानते हैं कि यह सिर्फ राजनीतिक या क्षेत्रीय इकाई से परे है।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत को एक ऐसी सांस्कृतिक चेतना के रूप में देखा, जो सदियों से चली आ रही है और सांस ले रही है, एक ऐसा भारत जो विपरीत भविष्यवाणियों के बावजूद हर चुनौती के बाद मजबूत होता है। वह भारत को ‘प्रबुद्ध’ बनाना चाहते थे या जागृत करना चाहते थे।

पीएम मोदी ने कहा कि अगर गरीब बैंकों तक पहुंच नहीं सकते हैं तो बैंकों को उन तक पहुंचना चाहिए। वह है जनधन योजना। यदि गरीब बीमा का उपयोग नहीं कर सकते हैं तो यह उन तक पहुंचना चाहिए। यह जन सुरक्षा योजना है। यदि गरीब स्वास्थ्य सेवा तक नहीं पहुंच सकते हैं, तो उन तक पहुंचना आवश्यक है- यह आयुष्मान भारत योजना है।

जानिए ‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका के बारे में

‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका भारत के प्राचीन आध्यामिक ज्ञान के संदेश को प्रसारित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है। इसका प्रकाशन चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) से शुरू किया गया था जहां से दो साल तक इसका प्रकाशन होता रहा। पत्रिका ‘प्रबुद्ध भारत’ का प्रकाशन चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) से साल 1896 में शुरू हुआ, जहां दो सालों तक इसका प्रकाशन जारी रहा जिसके बाद यह अल्मोड़ा से प्रकाशित हुआ। बाद में अप्रैल 1899 में पत्रिका के प्रकाशन का स्थान उत्तराखंड में मायावटी स्थित अद्वैत आश्रम में स्थानांतरित कर दिया गया था और तब से यह लगातार प्रकाशित हो रहा है। यह पत्रिका भारत के प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान के संदेश को फैलाने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

‘प्रबुद्ध भारत’ से जुड़ी महान शख्सियतें

नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, सिस्टर निवेदिता, श्री अरबिंदो, पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसी कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, दर्शन, इतिहास मनोविज्ञान, कला, और अन्य सामाजिक मुद्दे पर अपने लेखों के माध्यम से ‘प्रबुद्ध भारत’ में समय के साथ अपनी छाप छोड़ी है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, भगिनी निवेदिता, श्री अरबिंदो, पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे लेखकों ने कई वर्षो तक पत्रिका में योगदान दिया।


विश्व के कई देशों में पढ़ी जाती है पत्रिका

प्रबुद्ध भारत पत्रिका अमेरिका, आस्टे्रलिया, बांग्लादेश, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, जापान, कीनिया, मॉरिसस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, रूस, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, स्वीडन, इंग्लैंड, स्पेन, स्वीटजरलैंड, नेपाल देशों में पढ़ी जा रही है।