नरेंद्र सिंह तोमर का विपक्ष पर निशाना, कहा- जो लोग जमीनी आधार खो चुके, वो समय-समय पर कंधों की करते हैं तलाश 

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नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली से सटे बॉर्डर पर किसान धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों की मांग है कि सरकार इन कानूनों को निरस्त करे। किसानों के विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस, आप समेत कई अनेक पार्टियों का समर्थन मिला हुआ है। इसी बीच विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कुछ लोग जो जमीनी आधार खो चुके हैं, समय-समय पर वो कंधों की तलाश करते हैं और आज किसान आंदोलन से किसान के कंधों पर अपनी वैचारिक बंदूक चलाकर अपना हित साधना चाहते हैं। किसानों के हमदर्द बनकर उनको गुमराह करने का जो पाप कर रहे हैं उसकी सजा आने वाले कल में जनता उनको देगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को छोड़ पूरे देश की सरकारें पीएम किसान सम्मान निधि में शामिल हुई हैं। पश्चिम बंगाल में करीब 70 लाख पात्र हितग्राही हैं, अगर ये लोग इस योजना में शामिल होते हैं तो पश्चिम बंगाल के किसानों को वर्ष में 4,200 करोड़ रुपये मिलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अभी पश्चिम बंगाल के किसान इससे वंचित हैं। मैंने पूर्व में भी और कल भी पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जी को आग्रह किया है कि वो इस योजना में जल्दी शामिल हों।


किसानों और सरकार के बीच अगली बैठक में निकलेगा समाधान

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि किसानों और सरकार के बीच अगली बैठक में एक समाधान निकाला जाएगा। कई राज्यों के किसान भी नए कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री को धन्यवाद पत्र भेज रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने किसानों को दिया आश्वासन

वहीं, दूसरी ओर आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली के द्वारका में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि वह स्वयं किसान के बेटे हैं। खुले मंच से किसानों को आश्वासन देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि मोदी सरकार कभी ऐसा कुछ नहीं करेगी जो किसानों के हित में नहीं हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कहा कि अगर ये कानून लाभकारी नहीं लगते तो सरकार सभी जरूरी संशोधन इनमें लाएगी

पियूष गोयल बोले, किसानों के पास नहीं है कोई तर्क

किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दिल्ली के बॉर्डर पर जो लोग बैठे हैं उनमें कई लोगों को गलतफहमियां हैं और वो लगभग किसान एक ही क्षेत्र से आते हैं। देश में दो बार उन्होंने भारत बंद का एलान किया लेकिन वो सफल नहीं हुआ। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों के पास कोई तर्क नहीं है इसलिए वो चर्चा से भाग रहे हैं।