दुनियाभर में प्रति व्यक्ति हर साल चार पेड़ हो रहे हैं कम, भारत का यह है हाल

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दुनियाभर में जंगलों की कटाई बढ़ी है। नई शोध रिपोर्ट के मुताबिक, कॉफी से लेकर सोयाबीन तक की दर्जनों जिंसों के लिए धनी देशों में मांग बढ़ने से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में वनों की कटाई बढ़ती जा रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्रिटेन और अन्य धनी देशों के रवैये की वजह से प्रति व्यक्ति चार पेड़ लगातार कम हो रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि विकसित दुनिया में अब पेड़ों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन वनों की कटाई से जुड़े उत्पादों का आयात इन प्रयासों को कमजोर कर रहा है। यह शोध नेचर इकोलॉजी एंड इवॉल्यूशन में प्रकाशित हुआ है। वैसे तो भारत और चीन जैसे देशों में भी पेड़ कटाई बढ़ी है, लेकिन अभी भी यह अमीर देशों के मुकाबले काफी कम है। आंकड़ों के अनुसार, भारत और चीन के उपभोक्ता प्रति वर्ष जहां लगभग एक पेड़ के नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं, वहीं अमीर देशों के संगठन जी-7 समूह में यह संख्या लगभग चार हो जाती है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि यह जलवायु और जैव-विविधता के लिए काफी नुकसानदायक है। दुनिया के जंगलों को उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगने वाले पेड़ों की प्रजातियों की रक्षा करने और वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को सीमित करने के लिहाज से सबसे मूल्यवान माना जाता है। उष्णकटिबंधीय वन 50 से 90 फीसद स्थलीय पौधों और जानवरों के घर हैं।

इन देशों में सबसे अधिक कटाई

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में उष्णकटिबंधीय वनों की सबसे अधिक कटाई के मामले में ब्राजील पहले नंबर पर है। दुनिया के कुल दस देशों में ही 4.2 मिलियन हेक्टेयर उष्णकटिबंधीय वनों की कटाई हो गई। ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच के अनुसार, इनमें ब्राजील के साथ कांगो, बोलिबिया, इंडोनेशिया, पेरू, कोलंबिया, कैमरून, लाओस, मलेशिया और मैक्सिको शामिल हैं।


जंगलों की कटाई के बड़े कारण- बीफ, सोया और पाम ऑयल

आवर वर्ल्ड इन डाटा में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल जंगलों की एक-तिहाई कटाई कृषि के चलते होती है। दुनिया की बढ़ती आबादी के लिए अधिक खाद्यान की जरूरत के चलते ये जंगल कटकर खेतों में तब्दील हो जा रहे हैं। पर जंगल कटने का सबसे बड़ा कारण बीफ का उत्पादन है। 41 फीसद जंगल इसी के चलते कटते हैं। यानी करीब 2.1 मिलियन हेक्टेयर हर साल। यह नीदरलैंड के कुल आकार का आधा है। वहीं, ऑयल सीड और सोयाबीन उत्पादन से 18 फीसद कटाई होती है। इस तरह बीफ और ऑयल सीड के चलते करीब 60 फीसद पेड़ साफ हो जाते हैं। पेपर और लकड़ी संबंधी उद्योगों के चलते 13 फीसद जंगल से हम हाथ धो लेते हैं।


यह रिपोर्ट भी कर रही इशारा

ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच के एक अनुमान के मुताबिक, 2019 में 5.4 मिलियन हेक्टेयर जंगल कम हो गए। नई शताब्दी में हर साल दुनिया में 5 मिलियन हेक्टेयर जंगल कट जा रहे हैं। अगर हमें जंगलों की कटाई रोकनी है तो हमें यह जानना होगा कि कहां कितने जंगल कट रहे हैं और क्यों कट रहे हैं? द ग्लोबल एनवायरमेंट चेंज के शोधकर्ता फ्लोरेंस पेंड्रिल और उनके सहयोगियों के एक शोध में इन्हीं दो सवालों पर फोकस किया गया है। यह शोध 2005 से 2013 के बीच के आंकड़ों पर आधारित है। पर ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच के आंकड़ों से आज भी यही परिणाम मिल रहा है। नए आंकड़े सैटेलाइट डाटा पर आधारित हैं।

हर साल जितने जंगल कटते हैं, उनमें से ज्यादातर (95 फीसद) कटिबंधों वाले जंगल हैं। वहीं, इनमें से आधे जंगल ब्राजील और इंडोनेशिया में साफ हो रहे हैं। ब्राजील में हर साल 1.7 मिलियन हेक्टेयर वनों की कटाई होती है। पेड़ों की कटाई में इंडोनेशिया की हिस्सेदारी 14 फीसद है। यानी हर साल इंडोनेशिया और ब्राजील में ही 47 फीसद वनोन्मूलन हो रहा है। 2019 में यह आंकड़ा 52 फीसद के करीब पहुंच गया है।


43 साल में खत्म हो जाएगा दुनिया को 20% ऑक्सीजन देने वाला जंगल

दुनिया के सबसे बड़े जंगल अमेजन और धरती का फेफड़ा कहे जाने वाले इस इलाके को लेकर हैरान कर देने वाली जानकारी सामने आई है। दरअसल, रिसर्च में पता चला है कि अगले 43 सालों यानी साल 2064 तक यह जंगल पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। इसकी सबसे बड़ी वजह होगी जलवायु परिवर्तन, आग और ताबड़तोड़ पेड़ों की कटाई। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के भूगोल विज्ञानी रोबर्ट वॉकर दशकों से अमेजन का अध्ययन कर रहे हैं। 2064 में अमेजन के जंगल समाप्त होने की भविष्यवाणी करने लिए उन्होंने हाल ही के अध्ययन किए हुए आंकड़ों को संकलित किया। इसमें बताया गया है कि कैसे जंगलों में सूखे की घटनाएं, आग लगने की घटनाएं, पेड़ कटना और बारिश जैसे विभिन्न कारण जंगल की बर्बादी के लिए जिम्मेदार हैं।