डेमोक्रेसी रिपोर्ट-2020 पूर्वाग्रह से प्रेरित: डा. ए सूर्यप्रकाश

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प्रसार भारती के पूर्व चेयरमैन डा. ए सूर्यप्रकाश ने कहा कि डेमोक्रेसी रिपोर्ट-2020 पूर्वाग्रहों से प्रेरित है। इसमें भारत को नीचे तथा कई ऐसे देशों को लोकतंत्र में ऊंचे स्थान पर दिखाया गया है, जहां वाकई में लोकतंत्र भेदभाव होता है। उन देशों में तो धार्मिक व सामाजिक रूप से संवैधानिक स्तर पर भेदभाव किया जाता है। वह विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (वीआइएफ) द्वारा ‘लोकतंत्र को परिभाषित करना’ विषय पर आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। वेबिनार में देशभर से काफी संख्या में लोग जुड़े थे।

उन्होंने कहा कि इधर, कई ऐसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिपोर्टे आई हैं, जिनमें भारत के लोकतंत्र को लेकर आलोचना की गई है। जबकि विविधता से भरे भारत में हर किसी को अपनी पूजा पद्धति, भाषा व अभिव्यक्ति की आजादी जैसे अधिकार संविधान प्रदत्त है। बता दें, हाल ही में स्वीडन की एक संस्था की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत में लोकतंत्र खोने की कगार पर है। इस वेबिनार की अध्यक्षता वीआइएफ के निदेशक डा. अरविंद गुप्ता कर रहे थे।


सूर्यप्रकाश ने कहा कि जिस डेनमार्क को इसमें बेहतर लोकतांत्रिक मूल्यों वाला देश बताया गया है, वहां चर्च को राज्य द्वारा प्रोत्साहित करने की संवैधानिक व्यवस्था है। इसी तरह स्वीडन का संविधान वहां के राजा को असाधारण शक्तियां देता है। अर्जेंटीना में राज्य और धर्म के संबंधों में घालमेल है, जबकि हमारे संविधान में हर किसी को अपने धर्म को मानते हुए पूजा पद्धति अपनाने की पूर्ण आजादी है। यहां सरकार के स्कूलों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत में राजनीतिक दलों की विविधता को कमजोर पड़ने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, ऐसे लोग भूल जाते हैं कि यहां केंद्र व राज्यों में छोटे-बड़े कुल 44 दल मिलकर सरकार चला रहे हैं।


उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि संविधान की मूल भावना में बदलाव करने के लिए संसद के पास शक्तियां बेहद सीमित हैं। इसी तरह यहां भाषा की स्वतंत्रता है। यही कारण है कि प्रिंट मीडिया के साथ इलेक्ट्रानिक व वेब मीडिया तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे बड़ी स्वतंत्रता की मिसाल और क्या हो सकती है कि यहां रोजाना एंटी मोदी हैशटैग ट्रेंड होते हैं।