डीयू ने 28 कालेजों की गवर्निंग बाडी का कार्यकाल तीन माह बढ़ाया

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दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) प्रशासन ने 28 कालेजों की गवर्निंग बाडी का कार्यकाल तीन माह बढ़ा दिया है। विवि के संयुक्त कुलसचिव द्वारा 19 फरवरी को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। दरअसल, 15 जनवरी को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने डीयू प्रशासन को पत्र लिखकर दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित 28 कालेजों में नामित गवर्निंग बॉडी के सदस्यों को तीन महीने का विस्तार देने की मांग की थी।

उसी के आधार पर सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया गया है, जो कि 13 मार्च से शुरू होगा। आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) के प्रभारी हंसराज सुमन ने गवर्निंग बाडी के सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने पर खुशी जाहिर की है। सुमन ने बताया कि कार्यकाल बढ़ाने को लेकर डीटीए ने भी एक ज्ञापन डीयू प्रशासन को सौंपा था। अब कार्यकाल बढ़ने से इन कालेजों में पदोन्नति की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शैक्षिक व गैर शैक्षिक कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।


सुमन ने बताया कि विश्वविद्यालय अध्यादेश के अनुसार कालेजों की गवर्निंग बाडी को तीन-तीन महीने का विस्तार दिए जाने का प्रावधान है। सरकार को भी चाहिए कि वह अगली बार अपने नामित सदस्यों के नाम समय से पूर्व विश्वविद्यालय प्रशासन को भेज दे ताकि समय पर गवर्निंग बॉडी बनाने की प्रक्रिया पूरी हो सकें।

उधर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के श्री वेंकटेश्वरा कालेज को आंध्र प्रदेश के विश्वविद्यालय से जोड़ने की आंध्र प्रदेश सरकार की मांग का कालेज प्रशासन ने विरोध किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने इस मांग के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पास किया है।


आंध्र सरकार की मांग को लेकर डूटा अध्यक्ष राजीब रे का कहना है कि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा डीयू से संबद्ध श्री वेंकटरेश्वरा कालेज को आंध्र प्रदेश के विश्वविद्यालय से जोड़ने का हम विरोध करते हैं। यह विरोध न केवल आंध्र प्रदेश सरकार से है बल्कि केंद्र सरकार से भी है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र भी लिखा है।

शिक्षकों का कहना है कि हमें डर है कि यह कदम नई शिक्षा नीति की सिफारिशों के आधार पर संचालित हो सकता है। रे का यह भी कहना है कि आंध्र प्रदेश सरकार को खुद अपने यहां बेहतर शैक्षणिक संस्थान तैयार करने चाहिए न कि इस कालेज को वहां के संस्थान से जोड़ने की मांग।


इसी तरह केंद्र सरकार को भी इसके बारे में विचार करना चाहिए। डीयू से यह कालेज लंबे समय से जुड़ा है। जिस तरह आंध्र प्रदेश सरकार ने मांग की है उसी तरह दिल्ली सरकार सहित अन्य कालेज प्रबंधन भी मांग कर सकते हैं। इस अलगाव की मांग का हम विरोध करते हैं।