डीजल वाहनों के प्रति कम हुआ लोगों का रूझान, प्रदूषण कम करने की दिशा में दे रहे साथ

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सर्दियों में हर साल राजधानी की हवा दमघोंटू हो जाती है। इससे जनता को बचाने के लिए दिल्ली सरकार से लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक सभी अपने-अपने स्तर पर प्रयास करते हैं। हालांकि, इस पर खास अंकुश अब तक नहीं लग सका है, लेकिन तमाम सर्वे और अध्ययन यह बताते हैं कि राजधानी में प्रदूषण की एक बड़ी वजह डीजल वाहनों का अधिक मात्र में होना है।

ऐसे में इस साल डीजल वाहनों की बिक्री का जो आंकड़ा सामने आया है, वह काफी हद तक राहत देने वाला है। अन्य वाहनों की तुलना में इन वाहनों की बिक्री काफी कम हुई है। वहीं हाइब्रिड वाहनों की तरफ भी लोगों का रुझान बढ़ रहा है। हालांकि, 2020 में सिर्फ 32 डीजल हाइब्रिड वाहन बिके। वहीं पेट्रोल-हाइब्रिड वाहनों की बिक्री पांच हजार से ज्यादा हुई है।

क्या होते हैं हाइब्रिड वाहन

जिन गाड़ियों को चलाने के लिए दो या दो से अधिक ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल किया जाता है उन्हें हाइब्रिड वाहन की श्रेणी में रखा जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो इन वाहनों में दो तरह के इंजन होते हैं। यानी पेट्रोल या डीजल के साथ वाहन में एक इलेक्टिक इंजन भी होता है। दोनों इंजन वाहन को पावर सप्लाई करते हैं।


प्रदूषण बढ़ाने में थी बड़ी भूमिका

दरअसल राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ाने में इन डीजल वाहनों की बड़ी भूमिका थी, जिसको देखते हुए एनजीटी और अन्य महकमों की ओर से सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इसी कड़ी में लोगों को डीजल वाहनों से दूरी बनाने के लिए भी अपील की गई। इसका कुछ हद तक असर भी देखने को मिला है।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर


अब सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। वाहनों को चार्ज करने के लिए स्टेशन भी बनाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से ऐसे वाहन खरीदने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी देखने की भी घोषणा कर दी गई है। लोग उस ओर रूख कर रहे हैं। इससे राजधानी और आसपास के इलाके में प्रदूषण को कम करने की दिशा में मदद मिलेगी।