ट्रैक्टर की बैटरी से किसान चार्ज कर रहे अपने मोबाइल फोन

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3 कृषि कानूनों को रद करने की मांग को लेकर प्रदर्शकारी किसानों का धरना प्रदर्शन 7वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस बीच सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए किसानों के मोबाइल फोन डिस्चार्ज होने लगे हैं। ऐसे में हरियाणा और पंजाब से आए किसान 26 तारीख नवंबर से ही ट्रॉली में बैठकर ट्रैक्टर की बैटरी से ही अपने मोबाइल फोन चार्ज कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनके लिए यहां पर कोई सुविधा नहीं की गई है। आज के समय में मोबाइल फोन चार्ज नहीं हो तो बेचैनी होने लगती है। ऐसे समय लोग बारी -बारी से फोन चार्ज कर काम चल रहे हैं। फतेहगढ़ साहिब के किसान दिलबाग सिंह, गुरलाल सिंह और मांस के किसान जितेंद्र सिंह ने कहा कि बैटरी से चार्ज करने पर मोबाइल कम समय तक ही चार्ज रहता है। इस वजह से परेशानी हो रही है। लेकिन कितनी भी मुश्किल हो जाये अब वह पीछे हटने वाले नही हैं।

पंजाब और हरियाणा से चला किसानों का रेला

मिली जानकारी के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर दिल्ली आने के लिए कूच कर गए हैं। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों की दिक्कत बढ़ने वाली है। पहले सिर्फ सिंघु और टीकरी बॉर्डर ही सील थे, लेकिन अब दिल्ली-नोएडा बॉर्डर को भी सील कर दिया गया है।

ताजा मामले में गुरुग्राम की 360 गांव की झाड़सा खाप ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि गांव झाड़सा के सर छोटूराम धर्मशाला में प्रधान महेंद्र सिंह ठाकरान बुधवार दोपहर 12:00 बजे से एक अहम बैठक करेंगे। इसके बाद इसका एलान किया जाएगा।


वहीं, दिल्ली में किसानों के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर पर एक अहम बैठक चल रही है। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल भी मौजूद हैं।

बुधवार को यूपी गेट पर प्रदर्शन के दौरान हरदोई के रहने वाले हरप्रीत सिंह गाय लेकर किसानों के आंदोलन में पहुंचे। उन्होंने अपनी गाय दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेट में बांट दिया है। उनका कहना है कि किसान धरने पर बैठे हैं ।गांव में पशु भूखे नहीं रह सकते। ऐसे में यहां अपनी गाय को भी आंदोलन में लेकर पहुंचे हैं। यूपी गेट पर एक तरफ सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए लोग यज्ञ किया गया तो वहीं दूसरी ओर बैरिकेड के सामने जमकर नारेबाजी कर रहे हैं।


भारतीय किसान यूनियन की तरफ से यूपी गेट पर बुधवार को हवन किया गया। मुरादाबाद के किसानों यहां पर हवन किया। हवन करने में शामिल किसान ऋषि पाल सिंह का कहना है कि सरकार की बुद्धि को शुद्ध करने के लिए यह हवन किया गया, जिससे किसानों का दर्द समझ सके और उनकी सभी मांगे पूरी हों।
इससे पहले 3 केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर चल रहा किसानों का धरना-प्रदर्शन बुधवार को 7वें दिन में प्रवेश कर गया है। बुधवार को भी टीकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर के साथ दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर हजारों किसान धरने पर बैठे हुए हैं। इस बीच सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने टेंट लगाने शुरू कर दिए हैं। इसके साथ निहंगों ने बैरिकेड के पास खाना बनाना शुरू कर दिया है।


दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर तो किसानों ने सुबह बैरिकेड तोड़ दिया फिर उसी पर बैठकर देर तक धूप सेकते रहे।
दिल्ली पुलिस ने बुधवार सुबह ट्रैफिक को लेकर एडवायजरी जारी की है, जिसके मुताबिक, टीकरी बॉर्डर, झरोदा बॉर्डर और झटीकरा बॉर्डर बॉर्डर बंद है। सिर्फ दुपहिया वाहनों के लिए बाड़ूसराय बॉर्डर ट्रैफिक के लिए खोला गया है। वहीं, किसानों के प्रदर्शन के चलते चिल्ला बॉर्डर पर नोएडा लिंक रोड को बंद कर दिया गया है, ऐसे में नोएडा से दिल्ली आने के लिए नेशनल हाइवे-24 और डीएनडी का इस्तेमाल करें।


दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर किसानों ने बुधवार सुबह बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान यूपी के साथ दिल्ली पुलिस भी अलर्ट पर है।
वहीं केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब व हरियाणा के किसानों के प्रदर्शन से आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। सिंघु व टीकरी बॉर्डर के बाद सोमवार देर रात औचंदी बॉर्डर को भी सील कर दिया गया। यहां दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग के साथ-साथ डंपर भी खड़े कर दिए गए हैं।


दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर मंगलवार रात को उत्तर प्रदेश के किसानों का जत्था पहुंच गया। कृषि कानूनों के विरोध में यहां पर किसानों ने ट्रैक्टर-ट्राली के जरिये बॉर्डर के रास्ते को बंद कर दिया। आवागमन बाधित होते देखकर दिल्ली पुलिस के जवान पहुंचे और हालात पर काबू पाया। इस बीच बॉर्डर सील किए जाने से दिल्ली नोएडा लिंक रोड पर भीषण जाम लग गया। बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस ने एडवायजरी जारी की है कि वाहन चालक दिल्ली-नोएडा लिंक रोड का इस्तेमाल नहीं करें।
कृषि सुधार कानूनों के विरोध में पिछले कई दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन चल रहा है। अखिल भारतीय किसान महासंघ के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने बैठक को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ तीन दिसंबर को अगली बैठक के दौरान हम उन्हें समझाएंगे कि कृषि कानूनों का कोई भी किसान समर्थन नहीं करता। इसे लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
सिंघु और टीकरी बॉर्डर सील होने बाद औचंदी बॉर्डर से ही जरूरी सामान को दिल्ली पहुंचाया जा रहा था। वहीं, कच्चे रास्तों को भी खोद दिया गया है। इससे दिल्ली में दरियापुर गांव तक और हरियाणा में सैदपुर तक जाम लग गया।


निजामपुर, कंझावला, बवाना, नरेला समेत शहर में भी लोगों को जाम से जूझना पड़ा। बाद में दिल्ली व हरियाणा पुलिस की ओर से वाहनों को दूसरे रूट पर डायवर्ट कर दिया गया, लेकिन लोग इस रूट से दिल्ली व हरियाणा में प्रवेश नहीं कर पाए और परेशान होते रहे।

इससे पहले तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के साथ सरकार की मंगलवार को हुई तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा समाप्त हो गई। सभी की नजरें अब गुरुवार को होने वाली चौथे दौर की बातचीत पर टिक गई हैं। वार्ता खत्म होने के बाद बाहर आए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ‘आज (मंगलवार) की बैठक में परस्पर समझ बनी है।
अब चौथे चरण की वार्ता बृहस्पतिवार को होगी, जिसमें विस्तृत चर्चा होगी, क्योंकि के दौरान सरकार की ओर से संयुक्त समिति के गठन के प्रस्ताव को किसान नेताओं ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वार्ता का कोई नतीजा आने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।