जीत की जिद, हर्ड इम्युनिटी है जरूरी

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कई बार जिद अच्छे नतीजे दे जाती है। कोविड महामारी को हराने के लिए भारत और भारतीय जिस तरीके से दिन-रात एक किए हुए हैं, वह दिन दूर नहीं जब हम इस पर विजय हासिल करेंगे। लंबे अर्से तक नियंत्रण के बाद एक बार फिर कुछ राज्यों में संक्रमण में बढ़ोतरी दिखी है, लेकिन तमाम एहतियाती उपायों और टीकाकरण के बूते हम इस महामारी के ताबूत में आखिरी कील ठोकेंगे। बीते साल के सितंबर में कोरोना के हर दिन करीब एक लाख नए मामले सामने आ रहे थे। अब देश में रोजाना संक्रमण का औसत 10 से 15 हजार हो चुका है।

भारत की घनी आबादी, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और अन्य प्रतिकूल पहलुओं को देखते हुए जो विशेषज्ञ कुछ महीने पहले कर रहे थे कि भारत जल्द ही कुल संक्रमण के मामले में अमेरिका को पार कर जाएगा, वे अब पता नहीं क्या सोच रहे होंगे जब वे देखते हैं कि अमेरिका में कुल संक्रमण अब तक 2.8 करोड़ तक पहुंच चुका है जबकि भारत में 1.1 करोड़ के आंकड़े पर ही यह ठहरता दिख रहा है।

अपनी टीम के साथ कोविड-19 के माडल पर शोध करने भारत आए यूनिवर्सटिी आफ मिशिगन के महामारी विशेषज्ञ भ्रमर मुखर्जी मानते हैं कि मार्च के अंत तक नए मामलों में बहुत तेज गिरावट आ सकती है। सेंटर फार डिजीज डायनामिक्स एंड पालिसी के महामारी विशेषज्ञ रमणन लक्ष्मीनारायण का मानना है कि भारत में दूसरी लहर का अंदेशा नहीं है, अगर आती भी है तो वह बहुत सामान्य होगी। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून आने के दौरान नए संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं क्योंकि सामान्यतौर पर इस सीजन में फ्लू के मामले भी बढ़ जाते हैं।


बहरहाल भारत में महामारी के जल्द खात्मे को लेकर जो भी विशेषज्ञ बहुत आशान्वित हैं वे सब ये भी कह रहे हैं कि देश को चौकस रहने की जरूरत है। शारीरिक दूरी, मास्क का इस्तेमाल, कंटेनमेंट के उपायों पर गंभीरता से अमल, नए स्ट्रेन की प्रभावी निगरानी जैसे एहतियाती उपायों को बिना थके करते रहना होगा। साथ ही लोगों का तेजगति से टीकाकरण भी किया जाए। महाराष्ट्र और केरल सहित उत्तर भारत के कुछ राज्यों में बढ़ते मामलों ने चेतावनी दी है कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। बड़ी मुश्किल से हम सामान्य जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में बस कुछ दिन और संयम रखिए और अपने आचार-विचार और व्यवहार से इस महामारी को पटखनी दे दीजिए।

कोरोना महामारी से लड़ते हुए लगभग एक वर्ष होने को आ रहा है। यह सही है कि हम इस पर विजय प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन जरा सी लापरवाही प्रतिकूल परिणाम का सबब बन सकती है। वैसे ही लंबे अर्से के बाद कुछ राज्यों में नए मामलों की संख्या बढ़ने लगी है। इसलिए इस बेहद अहम पड़ाव पर महामारी को लेकर हमें बेहद सावधान और सतर्क रहना होगा। वैक्सीन आ चुकी है और लोगों को लगना शुरू हो गई है। अभी कोरोना के मामले पहले की तुलना में काफी कम हैं, यानी हमारे पास ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाने के लिए यही सही समय है। टीका लगाने के प्रति लोगों की अन्यमनस्कता को तो खत्म ही होना चाहिए, साथ ही कोरोना बचाव के लिए तो तय उपाय और एहतियात हैं, उन्हें भी नहीं छोड़ना चाहिए। इस ¨बदु पर ढील खतरे से खाली नहीं है।


देखा गया है कि वैक्सीन के बारे में लोग कुछ आशंकित हैं। लेकिन किसी को भी वैक्सीन के बारे में किसी तरीके का कोई संशय या उससे डरने की आवश्यकता नहीं। जब जिसका मौका आए उसे वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की दुविधा नहीं होना चाहिए। वैक्सीन हमें कोरोना से बचाव में मददगार साबित होगी। जैसे-जैसे कोरोना का प्रभाव कुछ कम हो रहा है, लोग बेफिक्र होते जा रहे हैं। समारोह में भीड़ जुट रही है और लोग मास्क की पाबंदी को भी नहीं मान रहे हैं। शारीरिक दूरी का भी अनुपालन कम होता दिखाई दे रहा है। हमें इससे बेफिक्र होने की जरूरत नहीं क्योंकि कोरोना महामारी से हमारी लड़ाई अभी जारी है। हम इससे पूर्ण रूप से मुक्त नहीं हो पाए हैं।


ऐसे में कोरोना से बचाव के लिए बनाई गई गाइडलाइन का अनुपालन शत-प्रतिशत करना होगा। भले ही वैक्सीन क्यों ना लग जाए। कहा जा रहा है कि वैक्सीन से हमें 80 से 90 प्रतिशत तक कोरोना से बचाव होगा। इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद भी कोरोना की आशंका को नकारा नहीं जा सकता है। दरअसल अलग-अलग लोगों की शारीरिक प्रतिरक्षा प्रणाली अलग-अलग होती है। हो सकता है कि किसी में टीकाकरण के बाद उसकी प्रतिरक्षा बहुत बढ़ जाए लेकिन ऐसे भी कुछ मामले होंगे जहां अपेक्षित नतीजे न निकले। इसी के चलते एक ही वैक्सीन अलहदा प्रतिरक्षा स्तर वाले लोगों में अलग-अलग प्रभाव दिखा सकती है। इसलिए इस बात को एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता है कि वैक्सीन लेने के बाद कोरोना नहीं होगा। तभी वैक्सीन लेने के बाद भी कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का शत-प्रतिशत अनुपाल अनिवार्य होगा।


जहां तक हर्ड इम्युनिटी की बात है, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसी घनी आबादी वाले शहरों में जो सर्वे हुए हैं उसमें ज्यादातर लोग सीरो पॉजिटिव पाए गए हैं। यानी ज्यादातर लोगों को कोरोना होकर निकल चुका है। लेकिन महाराष्ट्र और केरल के छोटे-छोटे शहरों में कोरोना के मामलों में इधर वृद्धि दिखाई दे रही है। उसकी वजह यही है कि अपेक्षाकृत कम घनत्व वाले इन शहरों में लोग सीरो पॉजिटिव नहीं हैं। यानी जिस दौरान देश में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर था तो ये लोग संक्रमण से बचे रहे, जिससे इनमें एंटीबॉडी नहीं बन सकी। ऐसे में मामलों में वृद्धि दिखाई दे रही है।


फिलहाल यह तो तय है कि कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में हम आखिरी मुकाम तक पहुंच चुके हैं लेकिन साथ ही यह भी बेहद जरूरी है कि जिस प्रोटोकॉल का अनुपालन हम करते आ रहे हैं, उसके प्रति कतई लापरवाही ना बरतें। वैक्सीन लगने के बाद भी मास्क का नियमित रूप से प्रयोग करें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, शारीरिक दूरी बनाए रखें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। तभी हम कोरोना से पूर्ण रूप से सुरक्षित हो सकते हैं।