जानिए IRDAI ने बीमा कंपनियों से कोविड-19 के इलाज की दरें तय करने के बारे में क्या कहा

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सामान्य और स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं को भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की ओर से सलाह दी गई है कि वे दूसरी बीमारियों की तर्ज पर कोरोना के इलाज की दरों के लिए स्वास्थ्य सेवा देने वालों के साथ समझौता करें। रेगुलेटर ने एक सर्कुलर में बताया कि स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के तहत ऐसे मामले जो ‘कैशलेस दावों’ के दावों से जुड़े हैं उनमें नियामक प्रावधानों के तहत पक्षों की ओर से तय किये गए रेट के अनुसार होने चाहिए।

IRDAI के मुताबिक, बीमाकर्ता कोशिश करें कि स्वास्थ्य सेवा देने वालों के साथ कोरोना के इलाज के लिए दूसरी बीमारियों के समान दरों पर ही समझौते हों। IRDAI ने बताया कि जब भी ऐसे समझौते हों तो उनमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के द्वारा निर्धारित दरों, सामान्य बीमा परिषद की संदर्भ दरों को ध्यान में रखना चाहिए।

गौरतलब है कि पिछले दिनों बीमा कंपनियों ने लघु अवधि की कोरोना कवच और कोरोना रक्षक पॉलिसियां जारी की थीं। इन पॉलिसियों की अवधि साढ़े तीन महीने, साढ़े छह महीने या साढ़े नौ महीने थीं। इन पॉलिसियों को तैयार करने का उद्देश्य कोरोना वायरस के इलाज पर होने वाले व्यय पर बीमा सुरक्षा देना था।

उल्लेखनीय है कि भविष्य की अनिश्चितत को देखते हुए इंश्योरेंस प्लान महत्वपूर्ण है। इंश्योरेंस प्लान में लाइफ इंश्योरेंस, होम इंश्योरेंस, कार इंश्योरेंस, ट्रैवल इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस प्रमुखता से शामिल हैं। आप अपनी जरूरत के हिसाब से प्लान ले सकते हैं। जितना जरूरी यह प्लान है उतना ही इसका रिन्यूअल भी महत्वपूर्ण है। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के समय सबसे पहले हम क्लेम के बारे में सोचते हैं। पॉलिसी खत्म होने से पहले आपको रिन्यू करना होगा ताकि इसके क्लेम या फायदों में कोई दिक्कत ना आए।

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