जानिए मेजेंटा मेट्रो लाइन के बाद कौन सी दूसरी लाइन पर अपनाई जाएगी ड्राइवरलेस ट्रेन तकनीक 

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दिल्ली मेट्रो एक के बाद एक उपलब्धियां अपने नाम करती जा रही है। इसी कड़ी में सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने पहली ड्राइवरलेस मेट्रो को हरी झंडी दिखाई। ये दिल्ली मेट्रो की मेजेंटा लाइन है। मेजेंटा लाइन दिल्ली में जनकपुरी वेस्ट और नोएडा में बोटेनिकल गार्डन को जोड़ती है। अब इस लाइन के बाद दिल्ली मेट्रो की अगली योजना पिंक लाइन पर ड्राइवरलेस ट्रेन चलाने की है।

पिंक लाइन मजलिस पार्क-शिव विहार के बीच चल रही है। इस लाइन पर इस तकनीक को अगले साल 2021 में चलाने की योजना है। मेट्रो प्रबंधन इसके लिए तैयारी कर रहा है। मेट्रो को चलाने से जुड़े कई काम पहले से ही ऑटोमैटिक हैं। हाई रिज़ॉल्यूशन के कैमरे लग जाने से ट्रैक पर केबिन से नजर रखने की जरूरत नहीं होगी। इस नए प्लान के मुताबिक ट्रैक और ट्रेन के ऊपर से गुजरने वाली तारों पर लगातार नजर रखी जाएगी और किसी आपातकाल की स्थिति में तुरंत क़दम उठाए जा सकेंगे।


मालूम हो कि अब से तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही तीन साल पहले मेजेंटा लाइन का उद्घाटन किया था, अब इसी रूट पर उन्होंने देश की पहली ऑटोमेटेड मेट्रो का भी उद्घाटन किया। इसी के साथ उन्होंने नेशनल कॉमन मॉबिलिटी कार्ड का भी उद्घाटन किया। इससे पहले पीएम ने बीते साल अहमदाबाद से इसी तरह से नेशनल कॉमन मॉबिलिटी कार्ड की शुरुआत की थी, अब इस साल 2020 में इसका विस्तार दिल्ली मेट्रो की एयर पोर्ट एक्सप्रेस लाइन तक हो गया है।


ऑपरेशन रूम से नियंत्रित की जा रही मेट्रो ट्रेनें

फिलहाल डीएमआरसी की ज्यादातर ट्रेन को रिमोट कंट्रोल के द्वारा ऑपरेशन रूम से नियंत्रित किया जा रहा है, इसको तकनीकी भाषा में ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर या ओसीसी कहते हैं। यहाँ से इंजीनियरों की टीमें पूरे नेटवर्क में रियल टाइम ट्रेन मूवमेंट पर नजर रखती हैं। ये एक तरह से एयरपोर्ट पर विमानों को कंट्रोल करने के लिए बनाए गए एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तरह होता है। जानकारी के अऩुसार डीएमआरसी के पास अभी तीन ओसीसी हैं, जिनमें दो मेट्रो मुख्यालय(क्नाट प्लेस) के अंदर और एक शास्त्री पार्क में है। ड्राइवर और ट्रेन ऑपरेटर के पास कितना कंट्रोल है ये इस बात पर निर्भर करता है कि वो किस लाइन पर ट्रेन चला रहे हैं।


रेड और ब्लू लाइन मेट्रो पर ड्राइवरों का अधिक कंट्रोल

मेट्रो के पुराने कॉरिडोर रेड लाइन और ब्लू लाइन पर ड्राइवर का अधिक कंट्रोल होता है। इन ट्रेनों में ड्राइवर ट्रेन की स्पीड से लेकर दरवाजे खुलने और बंद करने तक को कंट्रोल करते हैं हालांकि वो एक तय लिमिट से तेज गाड़ी नहीं चला पाते। दूसरी लाइनों पर ड्राइवर सिर्फ चलने का कमांड देते हैं लेकिन कई बार इन लाइनों पर भी ऑटोमैटिक कंट्रोल बंद कर दिए जाते हैं ताकि ड्राइवर किसी तरह की आपातकाल परिस्थिति के लिए तैयार रहें।


मेजेंटा लाइऩ पर ड्राइवरलेस ट्रेन ऑपरेशन

अब मेजेंटा लाइन पर मेट्रो का संचालन ड्राइवरलेस ट्रेन ऑपरेशन (डीटीओ) के तरीके से होगा। इसमें ट्रेनों का नियंत्रण बिना किसी इंसानी दखल के डीएमआरसी के तीन कमांड सेटंरों से किया जाएगा। कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) सिग्नलिंग तकनीक ट्रेनों के संचालन और उसमें किसी समस्या के समाधान को दुरुस्त करने में सक्षम है। ट्रेन के संचालन में किसी ड्राइवर की आवश्यकता तभी होगी जब वहां किसी तरह का कोई हार्डवेयर बदलने की जरूरत होगी। ड्राइवरलेस ट्रेन तकनीक का एक मापदंड होता है जिसे ग्रेड्स ऑफ़ ऑटोमेशन (जीओए) कहते हैं।


जीओए तकनीक

जीओए तकनीक में एक ड्राइवर ट्रेन चलाता है। जीओए 2 और जीओए 3 में ड्राइवर की भूमिका सिर्फ़ दरवाजों को खोलने और आपातकालीन परिस्थितियों में ट्रेन चलाने की होती है जबकि ट्रेन का चलना और रुकना ऑटोमैटिक होता है। जीओए 4 में पूरी ट्रेन अपने आप चलती है। डीएमआरसी के पास 2017 से यह तकनीक मौजूद है लेकिन इसे शुरू करने से पहले उसने कड़े परीक्षण किए हैं। इसकी शुरुआत मई 2020 से होनी थी लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।


कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ़्टी ने नियमों के साथ चलाने की दी इजाजत

कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) ने 18 दिसंबर को बिना ड्राइवर के ट्रेन की अनुमति दी है। साथ ही उन्होंने ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि कमांड सेंटर पर सबकुछ साफ दिखे और ट्रेन पर लगे कैमरों को नमी से मुक्त रखा जाए। डीएमआरसी के मुताबिक उन्होंने प्रणालियों के निरीक्षण और समीक्षा के लिए एक सलाहकार भी नियुक्त किया है। इसकी रिपोर्ट डीएमआरसी सीएमआरएस को परिचालन शुरू होने के बाद देगा। कमांड सेंटर पर इंफ़ॉर्मेशन कंट्रोलर होंगे, जो कि यात्रियों और भीड़ की मॉनीटरिंग करेंगे। इसके अलावा ट्रेन से जुड़ी दूसरी जानकारियों और सीसीटीवी की भी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।