खालिस्तान संगठन के साथ दिशा रवि और निकिता जैकब का संबंध, कैसे एक मीटिंग कर फंसी हैं दोनों

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टूलकिट मामले में 22 वर्षीय पर्यावरण के लिए काम करने वालीं कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी के बाद उसकी करीबी निकिता जैकब पर भी दिल्ली पुलिस स्पेशल ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, खालिस्तान संगठन से जुड़े पोइट फ़ॉर जस्टिस के एमओ धालीवाल ने अपने कनाडा में रह रहे सहयोगी पुनीत के जरिये निकिता जैकब से संपर्क किया था। मकसद रिपब्लिक डे के पहले ट्विटर स्टॉर्म पैदा करना था। यह अलग बात है कि निकिता जैकब पहले भी पर्यावरण से जुड़े मुद्दे उठाती रहीं है। रिपब्लिक डे के पहले एक ज़ूम मीटिंग भी हुई थी। इस मीटिंग में एमओ धालीवाल, निकिता जैकब और दिशा रवि के अलावा अन्य लोग शामिल हुए थे।

बड़ा मुद्दा बनाना है

मीटिंग में एमओ धालीवाल ने कहा था कि मुद्दे को बड़ा बनाना है। मकसद था किसानों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना है। यहां तक कि एक किसान की मौत को पुलिस की गोली से हुई मौत बताया गया। 26 जनवरी की हिंसा के बाद अंतरराष्ट्रीय सेलिब्रिटी और एक्टिविस्ट से संपर्क किया गया था। चूंकि दिशा ग्रेटा को जानती थीं इसलिए उसकी मदद ली गई। चार दिन पहले स्पेशल सेल की टीम निकिता जैकब के घर गई थी।


उसके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जांच की गई। उस वक्त शाम हो गई थी, इसलिए निकिता से पूछताछ नहीं की गई। जांच टीम ने कहा था कि वो अगले दिन फिर आएंगे, लेकिन जब अगले दिन स्पेशल सेल की टीम निकिता के यहां पहुंची वह गायब मिली। फिलहाल निकिता जैकब फरार है और उसके खिलाफ पुलिस ने NBW यानी गैर ज़मानती वारंट जारी करवाया है।

उधर, दिशा रवि की गिरफ्तारी पर राजनीति तेज हो गई है। अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर विरोध जताया है।वहीं, किसान और कांग्रेस नेताओं ने भी विरोध करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने पूछा है कि क्या किसानों के समर्थन वाली टूलकिट भारतीय सीमा में चीनी घुसपैठ से ज्यादा खतरनाक है? इसी के साथ शशि थरूर, प्रियंका गांधी वाड्रा और अरविंद केजरीवाल ने दिशा की गिरफ्तारी का विरोध किया है।


खालिस्तान समर्थकों के साथ मिलकर तैयार किया टूलकिट

दिशा ने वाट्सएप ग्रुप बनाया और खालिस्तान समर्थकों व अन्य को उसमें शामिल कर उनके साथ मिलकर टूलकिट डाक्यूमेंट तैयार किया
इस दौरान वाट्सएप ग्रुप के सभी सदस्यों ने खालिस्तान समर्थक संगठन ‘पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन’ से जुड़कर देश के खिलाफ माहौल तैयार किया
दिशा ने ही स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को टूलकिट डाक्यूमेंट भेजा
उसने मुख्य डॉक्यूमेंट हटाने को कहा था, लेकिन ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में ट्वीट के साथ अपलोड कर दिया था
टूलकिट में 26 जनवरी को हिंसा को लेकर साइबर स्ट्राइक की भी बात लिखी गई थी। दिशा का दावा है कि उसने सिर्फ दो लाइन संपादित कीं, जबकि पुलिस का कहना है कि उसने कई बार डाक्यूमेंट का संपादन किया