खाद्य तेलों की कीमतों में एक साल पहले की तुलना में 30 फीसद तक का इजाफा, सरकार के लिए बना चिंता का कारण

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खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। खाद्य तेलों की कीमतों में यह वृद्धि परिवारों के लिए किचन का खर्च तो बढ़ा ही रही है, साथ ही सरकार के लिए भी चिंता का कारण बनी हुई है। मूंगफली, सरसों, वनस्पती, सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम सहित सभी खाद्य तेलों की औसत कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है। पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में एक साल पहले के मुकाबले 20 से 30 फीसद तक का इजाफा हुआ है। कीमतों में इस उछाल ने लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मूल्य निगरानी सेल के आंकड़ों के अनुसार, सरसों के तेल की औसत कीमत गुरुवार को 120 प्रति लीटर थी। वहीं, एक साल पहले यह 100 रुपये प्रति लीटर थी। इसी तरह वनस्पती तेल की औसत कीमत बढ़कर 102.5 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जो एक साल पहले 75.25 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

सोयाबीन तेल की मॉडल कीमत 110 रुपये प्रति लीटर है। जबकि एक साल पहले यह कीमत 90 रुपये प्रति लीटर थी। पाम ऑयल और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में भी एक साल पहले की तुलना में इसी तरह बढ़ोत्तरी हुई है।

इससे पहले प्याज की कीमतों में बढ़ोत्तरी ने जनता को परेशान किया था, लेकिन अब प्याज की कीमतों में गिरावट आई है। प्याज की कीमतों में यह गिरावट करीब 30,000 टन प्याज का आयात करने के चलते देखने को मिली है। इसके अलावा आलू की कीमतें भी अब स्थिर हो गई है, लेकिन खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि जारी है।


खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि का बड़ा कारण पिछले छह महीनों से मलेशिया में पाम ऑयल के उत्पादन में कमी आना है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, सरकार अगर पाम ऑयल पर आयात शुल्क को कम कर दे, तो पाम ऑयल की कीमतों में गिरावट आ सकती है और इसका सीधा असर अन्य खाद्य तेलों की कीमतों पर भी पड़ेगा।