कोविड-19 के परीक्षण को लेकर CCMB के ‘ड्राई स्वैब टेस्टिंग’ को ICMR ने दी मंजूरी

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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने सीएसआइआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CSIR-Centre for Cellular and Molecular Biology) द्वारा विकसित कोरोना वायरस के लिए एक ड्राई स्वैब RNA- एक्सट्रक्शन (dry swab RNA- extraction) की फ्री टेस्टिंग को मंजूरी दे दी है। यह जानकारी शुक्रवार को सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) द्वारा दी गई।

बता दें कि राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) एक महत्वपूर्ण मैक्रोमोलेक्यूल है जो सभी जैविक कोशिकाओं में मौजूद है। अमूमन कोरोना टेस्टिंग केंद्रो में सैंपल को नासोफेरींजल या ऑरोफरीन्जियल स्वाब नमूनों को एकत्रित करके परीक्षण केंद्रों में ले जाया जाता है, जो कि कभी-कभी सैकड़ों किलोमीटर दूर होते हैं।

कोरोना के सैंपल आम तौर पर वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम (VTM) नामक लिक्विड में रखे जाते हैं। रिसाव से बचने के लिए उन्हें अच्छी तरह से पैक किया जाता है, जो सैंपल संग्रह और परीक्षण केंद्र दोनों पर सैंपल को समय में जोड़ता है।


शोधकर्ताओं का दावा VTM को पूरी तरह से टाला जा सकता है

इसके बावजूद सैंपल में से रिसाव होते हैं। जो उन बैचों को संभालने में अस्थिर और असुरक्षित प्रदान करते हैं। CCMB शोधकर्ताओं ने पाया कि VTM को पूरी तरह से टाला जा सकता है और ड्राई स्वैब तकनीक को भी आरएनए निष्कर्षण (Extraction) की आवश्यकता नहीं होती है और इसका वर्तमान मानक के समान संवेदनशीलता और विशिष्टता के साथ सीधे RT-PCR परीक्षण के लिए उपयोग किया जा सकता है।


चार घंटे में लिए जा सकते हैं 500 नमूने

वहीं, इस पद्धति को अब उन सेटिंग्स में उपयोग के लिए आईसीएमआर की मंजूरी मिल गई है जहां स्वचालित आरएनए निष्कर्षण उपलब्ध नहीं है। सीसीएमबी के निदेशक राकेश मिश्रा ने कहा कि ऑटोमेशन के साथ भी आरएनए निष्कर्षण (Extraction) लगभग 500 नमूनों में चार घंटे का समय लेता है।