कोरोना संक्रमण था 20 कोरोना वैक्सीन बनेगी 21

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कोरोना महामारी के शुरुआती दौर ने हर ओर से घेरेबंदी करने की पुरजोर कोशिश की। अब भला मनुष्य के जोश-जज्बे और संयम-समर्पण के आगे बीमारी कैसे टिकी रह सकती थी? वर्ष 2020 में संक्रमण दर अंधाधुंध बढ़ रही थी, प्रति व्यक्ति आय नीचे जा रही थी, सब कुछ हाथ से फिसलता नजर आ रहा था, लेकिन हालात बदलने की आस कायम थी। दिल्ली 21वीं सदी के 21वें वर्ष में खुद को 20 नहीं रहने देगी। जब पूरा देश कोरोना वैक्सीन के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है तो दिल्ली भी नई सुबह की तरफ बढ़ रही है।

हां, उत्साह और उम्मीदों के साथ चुनौती के वक्त से मिलीं कुछ जरूरी आदतों को अभी साथ लेकर ही चलना होगा, क्योंकि बीमारी का खतरा टला नहीं है। कामकाज की नई संस्कृति, व्यावहारिक और सांस्कृतिक बदलाव के साथ ही जिंदगी के आयामों को मुकाम तक पहुंचाना होगा। दिल्ली में संक्रमण दर भले एक फीसद से नीचे पहुंच गई है, लेकिन बीमारी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। नए स्ट्रेन भी वातावरण में फैल रहे हैं। सावधानी, सतर्कता और संयम ही संक्रमण से बचाव के अहम शस्त्र हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता करनी होगी विकसित : यह सभी को स्पष्ट हो जाना चाहिए कि वैक्सीन आने के बाद कोविड19 खत्म नहीं हो जाएगा। हां, यह निष्प्रभावी जरूर हो सकता है। वैक्सीन लगने के बाद शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता आ जाती है, लेकिन वायरस वैक्सीन लगे व्यक्ति के नाक और मुंह में अपना घर बना सकता है। ऐसे में वायरस भले ही वैक्सीन लगे व्यक्ति पर असर न दिखाए, दूसरों के संक्रमित होने का खतरा रह सकता है। संक्रमण को थामने के लिए जरूरी है कि देश की कम से कम 70 से 80 फीसद आबादी में रोग प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्युनिटी) विकसित हो जाए।


अभी सरकार की योजना जुलाई तक 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने की है। इसके बाद ही हर्ड इम्युनिटी विकसित होने की कल्पना कर सकते हैं। इससे पहले हमें इसके नए स्ट्रेन से भी निपटना है। हालांकि नए स्ट्रेन अधिक जानलेवा नहीं होते हैं लेकिन संक्रमण ज्यादा फैलाते हैं। इसलिए कम से कम इस साल तक भीड़भाड़ से दूरी रखनी होगी। बच्चों की कक्षाएं अधिकतर आनलाइन चलें तो बेहतर है। कोरोना काल में घर से ही कार्यालय का कार्य करने की शैली काफी अपनाई गई। इस पर भी कुछ शिथिलता के साथ अमल किया जा सकता है।