कोरोना मरीजों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया करा रहा गुरु की लंगर सेवा ग्रुप

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इसे अब प्रदूषण की मार कहे या बाजारों में बढ़ी चहल-पहल के बीच लापरवाही, कि कोरोना संक्रमण के मामले दोगुनी रफ्तार से पैर पसार रहे है। वहीं प्रदूषण ने कोरोना संक्रमित मरीजों की मुश्किलों को काफी बढ़ा दिया है। आलम यह है कि होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों में ऑक्सीजन की मांग बढ़ गई है। अस्पताल के भार को कम करते हुए गुरु की लंगर सेवा ग्रुप की ओर से होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना संक्रमितों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराया जा रहा है। जून माह से ये संस्था लगातार इस दिशा में कार्यरत है और अब तक हजारों जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा कर चुकी है।

संस्था के संचालक कमलजीत सिंह उर्फ संजू बताते है कि जुलाई में जहां वे रोजाना दो से तीन सिलेंडर मरीजों को उपलब्ध करा रहे थे, वहीं रोजाना दिल्ली के विभिन्न कोनों से 15 से 20 फोन आते है। उनके पास करीब 200 सिलेंडर है, जो जंगपुरा में भरे जाते हैं सभी फिलहाल मरीजों के पास है। शुरुआत में उनके पास छह सिलेंडर थे, बढ़ती मांग को देखते हुए उन्हें सिलेंडर की संख्या को भी बढ़ा दिया। इसके अलावा पहले वे पश्चिमी दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्र तक सिमटे हुए थे, लेकिन अब दिल्ली के सभी कोनो में वे मदद को तत्पर है


कमलजीत बताते हैं कि होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों के साथ अस्पताल में डिस्चार्ज हुए मरीजों को भी ऑक्सीजन की जरूरत महसूस हो रही है। हालांकि उनका सिलेंडर केवल चार घंटे तक ही ऑक्सीजन दे सकता है, पर कई मरीज ऐसे भी है जिन्हें 24-24 घंटे ऑक्सीजन पर रखने की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे मरीजों को जरूरी सलाह दी जा रही है। ग्रुप के पदाधिकारी जसअंगद ¨सह बताते हैं कि उनका ग्रुप बीते 30 सालों से लंगर बांटने की दिशा में काम कर रहा है। तिलक विहार में संतगढ़ में उनका कार्यालय स्थित है। कोरोना महामारी के दौर में लोगों की परेशानियों को मद्देनजर रखते हुए 22 जून से जरूरतमंद लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराने का काम शुरू किया गया था। साथ ही होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों को पल्स ऑक्सीमीटर व लेजर थर्मामीटर भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे नियमित रूप से अपने शरीर का तापमान व ऑक्सीजन स्तर को माप सके। इसका उद्देश्य है कि जैसे ही मरीज के शरीर में ऑक्सीजन स्तर कम हो वे ग्रुप के पदाधिकारियों से संपर्क कर ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग कर सकते है।


कई मामलों में देखा गया है कि कुछ दिन इलाज के बाद मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, पर होम क्वारंटाइन में रहने के दौरान उन्हें सांस लेने की तकलीफ बनी रहती है। विशेषकर 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में ये समस्या देखने को मिल रही है। ऐसे मामलों में चिकित्सक उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर घर में ही लगाने की सलाह दे रहे है। इन दिनों ऐसे कई लोग मदद के लिए आग्रह कर चुके है।

जसअंगद ने बताया कि मरीज के ठीक होने के बाद उन्हें दिया गया सामान वापस ले लिया जाता है, ताकि वह दूसरे जरूरतमंद मरीजों को भी उपलब्ध कराया जा सके। उपलब्ध कराने से पूर्व मरीज की कोरोना जांच रिपोर्ट व आधार कार्ड की कॉपी ली जाती है, ताकि रिकॉर्ड रखा जा सके। कागजात मिलने के बाद वॉलेंटियर्स मरीज के घर के बाहर सामान पहुंचा दिया जाता है। ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल कैसे करना है, इसके लिए उन्होंने एक वीडियो बनाई है, ताकि तीमारदारों को दिक्कत न हो। बावजूद वे यदि सिलेंडर का प्रयोग नहीं कर पाते है तो वॉलेंटियर्स पीपीई किट पहनकर घर में जाते है और उनकी मदद करते है। हालांकि सिलेंडर का प्रयोग चिकित्सकों के दिशानिर्देश के अनुरूप ही किया जाता है। समाप्त मनीषा गर्ग