कोरोना काल की आपदा को दिल्ली सरकार ने बनाया अवसर

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One Year of Kejriwal Government कोरोना काल वो दौर था जिसमें जिसने संयम और व्यवस्थित तरीके से चलने का परिचय दिया, वही सफल रहा। जान है तो जहान है जैसे नारों के मर्म को आत्मसात कर नियमों का पालन करते हुए खुद की और दूसरों की भी सुरक्षा के लिए पूरा एहतियात बरता। दिल्ली देश में सर्वाधिक संक्रमण दर वाले राज्यों में भी रहा और मौत भी सर्वाधिक हुईं। उसके बावजूद सरकार ने बहुत ही व्यवस्थित तरीके से संयम का परिचय देते हुए लोगों का हौसला भी बढ़ाते हुए कोरोना संक्रमण दर को न्यूनतम की दहलीज पर ला दिया।

यह एक सरकार की व्यवस्थित कार्य प्रणाली का ही परिणाम था। अस्पताल शुरू किए, देश का पहला प्लाज्मा बैंक बनवाया, अस्पतालों में वेंटिलेटर से लेकर आक्सीजन बेड तक की व्यवस्था की। होम आइसोलेशन में मरीज खुद को अकेले महसूस नहीं करें, इसलिए उनका सुबह-शाम हालचाल लेने की व्यवस्था की गई।


कोरोना संक्रमण की शुरुआत मार्च 2020 के पहले सप्ताह से हुई थी और उससे एक माह पहले फरवरी में ही दिल्ली सरकार ने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत की थी। लेकिन सरकार ने समय न गंवाते हुए चुनौतियों को बढ़ता देख इस कोरोना काल को स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के अवसर के रूप में लिया। एक साल पहले तक दिल्ली सरकार के किसी अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा नहीं थी। कोरोना की जांच की सुविधा भी सिर्फ राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) व एम्स में थी, लेकिन जैसे-जैसे कोरोना का संक्रमण बढ़ता गया, दिल्ली में कोरोना की जांच क्षमता भी बढ़ती चली गई। मौजूदा समय में दिल्ली में 95 लैब हैं, जिनमें 29 सरकारी व 66 निजी लैब शामिल हैं। इनमें से आठ लैब दिल्ली सरकार के अस्पताल में कार्यरत हैं। वहीं, 21 सरकारी लैब केंद्रीय संस्थानों में संचालित हो रही हैं। जांच क्षमता बढ़ाने में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लिहाजा, कोरोना पर थोड़ी बहुत सियासत के बीच दिल्ली व केंद्र सरकार के बीच बेहतर सामंजस्य से कोरोना को नियंत्रित किया जा सका।


महाराष्ट्र, कर्नाटक व तमिलनाडु के बाद दिल्ली में कोरोना से सबसे अधिक मौत हुईं। मई-जून में कोरोना के संक्रमण व मौत के मामले बढ़ने पर हालात बिगड़ते नजर आ रहे थे। अस्पतालों में बेड कम पड़ने लगे थे। पिछले साल जून तक ही पांच लाख मामले आने की आशंका सामने आने के बाद दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए बेड आरक्षित किए। अक्टूबर व नवंबर में भी हालात बिगड़ने पर दिल्ली व केंद्र सरकार ने मिलकर आरटीपीसीआर जांच बढ़ाई। इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने मास्क नहीं पहनने पर जुर्माने की राशि 500 से बढ़ाकर दो हजार रुपये की, जो कोरोना की लड़ाई में बेहद निर्णायक साबित हुआ।


दो नए अस्पताल भी बने मददगार : दिल्ली सरकार ने अंबेडकर नगर व बुराड़ी में पिछले साल दो नए अस्पताल शुरू किए। अंबेडकर नगर में करीब 180.95 करोड़ की लागत से 600 बेड का अस्पताल बना है। यहां विगत अगस्त में कोरोना संक्रमण को देखते हुए 200 बेड का अस्पताल शुरू कर दिया गया। वहीं, बुराड़ी में 265.80 करोड़ की लागत से अस्पताल बनकर तैयार हुआ। पहले इस अस्पताल को 200 बेड का बनाया जाना था, लेकिन बाद में दिल्ली सरकार ने मई 2018 में इसमें 768 बेड का अस्पताल बनाने का प्रविधान किया। कोरोना के संक्रमण के दौर में जुलाई में दिल्ली सरकार ने 450 बेड की क्षमता के साथ इसकी शुरुआत की, जिसमें 125 आक्सीजन बेड की व्यवस्था की गई है।


लगभग पांच हजार लोगों को प्लाज्मा उपलब्ध कराया गया: दिल्ली सरकार ने दो जुलाई 2020 को यकृत व पित्त विज्ञान संस्थान (आइसीएमआर) में एक प्लाज्मा बैंक शुरू किया। दिल्ली सरकार इसे देश का पहला प्लाज्मा बैंक बताती रही है, जिससे 4,929 मरीजों को प्लाज्मा उपलब्ध कराया गया।

पल्स आक्सीमीटर: होम आइसोलेशन की व्यवस्था शुरू होने पर दिल्ली सरकार ने घर पर रहकर इलाज कराने वाले मरीजों को पल्स आक्सीमीटर उपलब्ध कराने की पहल की, ताकि मरीज खुद आक्सीजन स्तर की जांच कर अपने स्वास्थ्य पर निगरानी रख सकें।


लोकनायक में सबसे ज्यादा कोरोना मरीजों का इलाज: लोकनायक अस्पताल में कोरोना के इलाज के लिए सबसे अधिक 2,000 बेड की व्यवस्था की गई। इस अस्पताल में कोरोना पाजिटिव व संदिग्ध मिलाकर कुल 15 हजार मरीजों का इलाज हुआ, जिसमें से 10,890 मरीज ठीक हो चुके हैं।