कैंसर की दवा को लेकर फाइजर ने अमेरिकी कोर्ट में दी भारत की अरविंदो फार्मा, डा. रेड्डी के खिलाफ अर्जी

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अमेरिका में कोरोनो वैक्सीन का निर्माण कर रही कंपनी फाइजर इंक और उसकी समूह कंपनियों ने भारतीय दवा कंपनियां अरविंदो फार्मा लिमिटेड और डा रेड्डी लैबोरेटरीज के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। फाइजर ने आरोप लगाया है कि भारतीय दवा निर्माता कंपनियां उसकी अरबों डॉलर का राजस्व अर्जित करने वाली दवा इब्रैंस (पाल्बोसिक्लिब) की पेटेंट अवधि समाप्त होने से पहले उसका जेनेरिक वर्जन लाने की योजना बना रही हैं।

फाइजर ने अरविंदो फार्मा के खिलाफ डेलावेयर स्थित अमेरिकी डिस्टि्रक कोर्ट में और डा.रेड्डी के खिलाफ न्यूजर्सी कोर्ट में संभावित पेटेंट उल्लंघन का मामला दायर किया है। पाल्बोसिक्लिब का प्रयोग खास किस्म के ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में प्रयोग किया जाता है। यह दवा कैंसर सेल्स के विकास को धीमा करती है या उसे रोक देती है। फाइजर की 2019 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, इब्रैंस ने दुनिया भर में करीब पांच अरब डॉलर (करीब 37 हजार करोड़ रुपये) का राजस्व अर्जित किया।


अमेरिकी डाक्टर ने कहा, वैक्सीन के बाद भी मास्क और दूरी जरूरी

अमेरिका के प्रसिद्ध संक्रामक रोग विशेषज्ञ डा. एंथनी फॉसी ने कहा है कि सभी के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद भी शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए मास्क पहनने की आवश्यकता बनी रहेगी। सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में डा.फॉसी ने यह बात उस समय कही, जब उनसे पूछा गया क्या वैक्सीन आने के बाद सब कुछ सामान्य हो जाएगा।


उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि 90 फीसद असर के साथ वैक्सीन आने से आत्मविश्वास बढ़ेगा, लेकिन फिर भी मैं जनता को सावधानियां छोड़ने की सलाह नहीं दूंगा। क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि वैक्सीन लेने के बाद आप पूरी तरह सुरक्षित हैं। अभी यह भी एक सवाल है कि वैक्सीन आप पर कितना असर करती है। एक सवाल के उत्तर में डा.फॉसी ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि अभी सामान्य स्थिति आने में कितना समय लगेगा। निश्चित ही स्थितियां एक दम नहीं बल्कि धीरे-धीरे बदलेंगीं। यह महामारी कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है, जो एकदम शुरू हो जाए और एक दम बंद हो जाए।