किसान आंदोलन ने दिल्ली के पर्यटन पर भी लगाया ग्रहण

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किसान आंदोलन ने दिल्ली-एनसीआर की रफ्तार ही नहीं थामी, बल्कि पर्यटन उद्योग पर भी ग्रहण लगा दिया है। अंतराष्ट्रीय पर्यटन तो लॉकडाउन से ही प्रभावित चल रहा है, धीरे-धीरे उठना शुरू हुआ घरेलू पर्यटन भी अब बैकफुट पर आने लगा है। खासतौर पर दिल्ली- एनसीआर से घूमने जाने वाले ज्यादातर लोगों ने अपना कार्यक्रम या तो रद या स्थगित कर दिया है। सिंघु बॉर्डर पर आवागमन ठप होने से देश के पांच अन्य राज्यों में भी पर्यटकों की संख्या गिर रही है। सिंघु बॉर्डर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या एक पर पड़ता है। यह राजमार्ग दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को ही आपस में नहीं जोड़ता, बल्कि पाकिस्तान जाने का भी संपर्क मार्ग है। लेकिन, पिछले करीब दो सप्ताह से इस बॉर्डर पर आवागमन पूरी तरह बाधित है। न तो बसें ही चल रही हैं और न ही निजी वाहन।


वहीं, रेल मार्ग को लेकर भी आशंका बनी हुई है कि न जाने कब बाधित हो जाए। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और परेशानी से बचने के लिए ज्यादातर लोगों ने अपना कार्यक्रम फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस वक्त केवल वही लोग सफर कर रहे हैं जिन्होंने या तो हवाई मार्ग चुना या फिर उनका कार्यक्रम रद होने वाला नहीं था तो उन्होंने कोई वैकल्पिक मार्ग अपना लिया। वहीं बीते एक दिसंबर को विवाह बंधन में बंधे राहुल और खुशबू ने बताया कि उन्हें आठ तारीख को हिमाचल प्रदेश के लिए निकलना था, लेकिन बॉर्डरों के हालात देखकर फिलहाल यात्रा स्थगित करना ही बेहतर समझा।


एसोसिएशन ऑफ डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर्स ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कोरोना काल में पर्यटन उद्योग खत्म सा हो गया है। दीवाली के बाद घरेलू पर्यटन थोड़ा बढ़ना शुरू हुआ था, लेकिन किसान आंदोलन के चलते वह भी ठप होने लगा है। खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर के लोग एहतियात बरतते हुए अपना कार्यक्रम टाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि 70 फीसद तक लोग इन हालात में बाहर जाने से बच रहे हैं। जिनका जाना जरूरी है, वही वैकल्पिक मार्गों का सहारा ले रहे हैं।


इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के अध्यक्ष सुभाष गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन तो पहले से ही ठप है, शादी ब्याह के इस सीजन में घरेलू पर्यटन ने थोड़ी बहुत रफ्तार पकड़ी थी, लेकिन किसान आंदोलन ने उसकी फिर से कमर तोड़ दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह के तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं, उसमें ज्यादातर लोगों की सोच यही है कि परिवार को जोखिम में नहीं डाला जा सकता, इसीलिए वे इस दौरान कहीं भी घूमने जाने का कार्यक्रम रद कर रहे हैं।


यात्री टूर एंड ट्रेवल्स के संचालक रवींद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने तो लॉकडाउन के दौरान ही अपना कार्यालय बंद कर दिया था। स्टाफ को भी वेतन देकर घर भेज दिया था। बिना ग्राहक के खर्च निकालते भी कैसे? अब थोड़ी बहुत बु¨कग आनी शुरू हुई थी, लेकिन वह भी रद होने लगी है।