उड़े गुलाल हुए सब निहाल…तस्‍वीरों में देखें लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर में संतों की होली

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होली का त्योहार आने में अभी भले ही कई दिन हों, लेकिन रंगभरी एकादशी के साथ ही रंगों का उल्लास नजर आने लगता है। बुधवार को मनकामेश्वर मंदिर परिसर में महंत देव्या गिरि के सानिध्य में महिला संतों की दिव्य होली खेली गई। ब्रज के पारंपरिक होली गीतों के बीच जब महिला संतों पर फूल बरसाए गए गए तो हर कोई यह दृश्य देखने को बेकरार नजर आया।

महंत दिव्या गिरि के सानिध्य में पहले बाबा मनकामेश्वर व अन्य देवी-देवताओं, गुरुओं को गुलाल लगाया गया। उसके बाद महंत दिव्या गिरि पर फूल बरासाए गऐ। होली खेले नंदलाल.., उडे गुलाल हुए सब निहाल…और रंग डारे कन्हैया रंग डारे जैसे गीतों के बीच गुलाल उड़ा तो सब एक रंग में नजर आने लगे। महंत ने बताया कि होली में प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया गया।


होली में महंत लीलापुरी, गौरजा गिरि, कल्याणी गिरि , रितु कश्यप, ईशा कश्यप, किरण कपूर, मालती शुक्ला, वॢतका श्रीवास्तव, नीतू सिंह, शशि चंद्रमा, उपमा पांडे, तुलसी पांडेय एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली खेली।

आज से तैयार होगी कंडों की होलिका: मनकामेश्वर उपवन घाट पर गुरुवार से पांच हजार कंडों से होलिका तैयार की जाएगी। इसमें घाट परिसर को मंडप के रूप में सजाया जाएगा। महिलाएं रंगोली बनाकर रंगोत्सव के आने का संदेश देंगी। 28 मार्च को पूॢणमा के अवसर पर गोमती आरती के साथ होलिका दहन होगा। गिलोय, कपूर, लौंग, इलायची, गुग्गल, जौ, तिल, जावित्री, जायफल, पीली सरसों, पंच मेवा, नारियल गोला, आम के पत्ते, चंदन को होलिका में अर्पित कर कोरोना से बचाने के उपाय किए जाएंगे। युवाओं के लिए सेल्फी प्वाइंट भी तैयार किया जाएगा।

होलिका दहन मुहूर्त: आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि 28 मार्च को होली दहन का मुर्हूत शाम 6:21 बजे से रात्रि 8:41 बजे तक है। होलिका की परिक्रमा करके होलका दहन किया जाता है। आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि शुभ मुहूर्त में गुलाब व बेला की खुशबू युक्त गुलाल अॢपत करना उत्तम होगा।

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