इस बड़े क्रिकेटर ने अचानक टेस्ट क्रिकेट से किया संन्यास का ऐलान

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साउथ अफ्रीका टीम के पूर्व कप्तान फाफ डुप्लेसिस ने आज टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। फाफ आने वाले दो टी20 वर्ल्ड कप में खेलने के लिए तैयारी करना चाहते हैं। साउथ अफ्रीका की मीडिया के मुताबिक, फाफ डु प्लेसिस ने इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला है। 36 वर्षीय ने 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड ओवल में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया, जहां उन्होंने दूसरी पारी में 375 गेंदों पर 110 रनों की नाबाद पारी खेली। 

साउथ अफ्रीका की टीम इस महीने के अंत में शुरू होने वाली तीन मैचों की सीरीज में ऑस्ट्रेलिया का सामना करने वाली थी, लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कोविड-19 चिंताओं के कारण अंतिम समय में दौरे को स्थगित कर दिया था। ऐसे में फाफ डुप्लेसिस ने अपने टेस्ट करियर को अलविदा कह दिया है। फाफ डुप्लेसिस के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की खबर को साउथ अफ्रीका के न्यूज पोर्टल इंडेपेंडेंट मीडिया को सार्वजनिक किया है। 

फाफ डुप्लेसिस ने कहा है, “मैं वास्तव में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज के साथ समाप्त करना चाहता था। ऐसा लगा होगा कि यह सब पूरी तरह से आ गया है। मेरे पास दिमाग और दिल की स्पष्टता थी और भले ही अंत यह नहीं है कि मैंने कैसे कल्पना की थी, स्पष्टता बनी हुई है।”  2012 में साउथ अफ्रीकाई टीम के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले डुप्लेसिस को साल 2016 में टेस्ट कप्तान नियुक्त किया गया था।

फाफ डुप्लेसिस ने एबी डिविलियर्स से कप्तानी ली थी, जो कि उनके स्कूल के दोस्त हैं। वह साउथ अफ्रीका के एकमात्र कप्तान हैं, जिन्होंने 2016 में ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में हराया था, जबकि 2018 में घरेलू सीरीज में कंगारू टीम को मात दी थी। उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में कप्तानी की और 17 में जीत हासिल की, लेकिन आखिरी के कुछ टेस्ट मैच बतौर कप्तान उनके लिए अच्छे नहीं रहे थे, जिनमें भारत का दौरा भी शामिल था।

बतौर कप्तान और बतौर बल्लेबाज फाफ डुप्लेसिस का रिकॉर्ड बीते दो साल में अच्छा नहीं रहा। यही कारण है कि उन्होंने संन्यास की घोषणा कर दी। 36 वर्षीय फाफ डुप्लेसिस ने 69 टेस्ट मैचों की 118 पारियों में 40 से ज्यादा की औसत से 4163 रन बनाए हैं, जिसमें 10 शतक और 21 अर्धशतक शामिल हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वाधिक स्कोर 199 रन है। उन्होंने पांच पारियों में गेंदबाजी भी की, लेकिन कोई सफलता उनको नहीं मिली थी।