आर्थिक सुधार के लिए कोरोना वैक्सीन आने तक सावधानी जरूरी : सीईए

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मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमणियन ने कहा है कि आर्थिक सुधार की गति जारी रखने के लिए कोरोना की वैक्सीन आने तक सावधान रहना होगा। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर, 2020) के जीडीपी आंकड़ों को उत्साहजनक करार देते हुए सीईए ने कहा कि आर्थिक सुधार को लेकर हम आशावादी हैं, लेकिन इसकी गति कोविड-19 की चाल पर निर्भर करेगी। उन्होंने यूरोप के देशों में कोविड-19 की दूसरी लहर का उदाहरण देते हुए वैक्सीन आने तक कोरोना को लेकर जरूरी नियमों का पालन जारी रखने के लिए कहा।

दूसरी तिमाही में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 7.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है जबकि लगभग सभी रेटिंग एजेंसियों का अनुमान 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का था। सुब्रमणियन ने कहा कि दूसरी तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग में बढ़ोतरी है। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से सेवा क्षेत्र की बढ़ोतरी प्रभावित रहेगी। दूसरी तिमाही के दौरान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक सकारात्मक क्षेत्र में प्रवेश कर गया है और आठ प्रमुख औद्योगिक उत्पादन का स्तर पिछले साल के स्तर को छू लिया है।


कंज्यूमर ड्यूरेबल गुड्स के उत्पादन में वी-शेप की रिकवरी हुई है। दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र के ग्रॉस वैल्यू एडेड में 3.4 फीसद की बढ़ोतरी हुई है और उपयोगिता से जुड़ी गैस, बिजली व पानी आपूर्ति व अन्य सेवाओं के जीवीए में 4.4 फीसद का इजाफा हुआ है। सीईए ने बताया कि दूसरी तिमाही में कॉरपोरेट सेक्टर का परिचालन लाभ पिछले वर्ष सितंबर के स्तर पर आ गया।सुब्रमणियन के मुताबिक स्टील उत्पादन के स्तर से पता चलता है कि निर्माण क्षेत्र पहले वाली स्थिति में पहुंच रहा है।

बिजली खपत और ई-वे बिल के सृजन में अक्टूबर के दौरान दहाई अंकों की बढ़ोतरी देखी गई। निर्यात में भी बढ़ोतरी दिख रही है और आयात में बढ़ोतरी घरेलू मांग में इजाफा को जाहिर कर रहा है। सुब्रमण्यिन ने कहा कि खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में बढ़ोतरी होने एवं नई फसल की आवक से महंगाई दर में कमी आने की संभावना है।