आज विश्व भारती विश्वविद्यालय के वर्चुअल दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज विश्व भारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। पीएमओ ऑफिसर की ओर से जारी सूचना के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विश्वभारती के दीक्षांत समारोह को संबोधित करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी इस समारोह में उपस्थित रहेंगे।

विश्वविद्यालय ने बयान में कहा है कि दीक्षा समारोह शांति निकेतन परिसर के आमरा कुंज में सुबह 9.30 बजे शुरू होगा। इस दीक्षांत समारोह में छात्र भी सीमित संख्या में उपस्थित होंगे।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 फरवरी को बंगाल आ रहे हैं। इस दौरान जहां वह एक ओर नोआपाड़ा से दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशन तक मेट्रो सेवा का शुभारंभ करेंगे, वहीं दूसरी ओर हुगली जिले में सभा को भी संबोधित करेंगे। विश्वभारती को 1951 में केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा मिला था। यह एकमात्र केंद्रीय विवि है, जिसके कुलाधिपति देश के प्रधानमंत्री होते हैं।


विश्व भारती की खासियत

पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन स्थित विश्व भारती एक ऐसा विश्वविद्यालय है, जहां प्राचीन भारत की आत्मा बसती है। विश्व भारती की स्थापना 1921 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी। यह देश का सबसे पुराना केंद्रीय विश्वविद्यालय(Central University) है। यहां आज भी खुले आकाश तले पेड़ों की छांव में कक्षाएं लगती हैं। इस विश्वविद्यालय में आज भी गुरुकुल व्यवस्था की तरह ही खुले आकाश तले पेड़ों की छांव में कक्षाएं लगती हैं।


इसका मतलब यह नहीं कि विश्वविद्यालय कंप्यूटरीकृत ऑनलाइन शिक्षा के इस युग में पिछड़ा होगा। विश्व भारती विश्वविद्यालय भारत का केंद्रीय विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का संस्थान भी घोषित है। परिसर में हर ओर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक दिखाई देती है।

शांति निकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की शुरुआत एक आश्रम के तौर पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर (ठाकुर) के पिता महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1863 में एक आश्रम की स्थापना की थी। बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इस विश्वविद्यालय को स्थापित किया। 1901 में केवल 5 छात्रों के साथ गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर ने इसकी शुरुआत की थी। 1921 में इसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।