आखिर क्यों खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं आंदोलनकारी किसान

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केंद्र सरकार व किसानों के बीच पांच दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद आंदोलनरत किसानों का विरोध प्रदर्शन 12वें दिन भी जारी है। समय बीतने के साथ-साथ इस आंदोलन के पीछे राजनेताओं के नापाक इरादों का भी पर्दाफाश हो रहा है। किसान अब उन नेताओं को आंदोलन स्थल पर ढूंढ़ रहे हैं, जिन्होंने आंदोलन के लिए पहले उकसाया और बाद में आंदोलन शुरू होने के बाद भूमिगत हो गए। न तो नेताओं की तरफ से कोई बयान जारी किए जा रहे हैं और न ही आंदोलन स्थल पर किसानों की सुध लेने पहुंच रहे हैं। किसानों का कहना है कि पंजाब के राजनेता हमें आंदोलन में आगे बढ़ाकर खुद खिसक गए हैं। इससे किसान अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं।

सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे नरपिंदर सिंह ने बताया कि जब हमलोग पंजाब में आंदोलन कर रहे थे उस समय पंजाब के कई सांसद व विधायक हमारे पास आकर हमदर्दी जताते थे। साथ ही आंदोलन में अपना समर्थन देने की बात भरे मंच से करते थे, लेकिन जब उनके ही कहने पर 26 नवंबर को दिल्ली कूच करने की योजना बनाई गई तब वे पहले ही दिल्ली पहुंचे और अपनी गिरफ्तारी दी। आंदोलन से एक दिन पहले आकर गिरफ्तारी देने की बात हम किसानों को समझ में नहीं आई। हम सोच रहे थे कि वे हमारे साथ आंदोलन स्थल पर मौजूद रहेंगे, लेकिन 26 नवंबर से अभी तक उनका चेहरा यहां पर नहीं दिखा है। पंजाब के किसानों के साथ नेताओं ने छल किया है।


उन्होंने कहा कि पंजाब में आंदोलन के दौरान कांग्रेस के बड़े नेताओं से लेकर दूसरी पार्टियों के नेताओं ने रोड शो कर हमारा समर्थन किया था, लेकिन दिल्ली बॉर्डर पर आते ही सबने किनारा कर लिया। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी के नेता नहीं चाहते हैं कि किसानों का भला हो। किसान अपने हक की लड़ाई अकेले लड़ना जानता है। गुरवीर ¨सह ने बताया कि हम चाहते हैं कि पंजाब में जिन नेताओं ने साथ निभाने का वादा किया था वे आंदोलन स्थल पर आएं और हमारे साथ रहें, तभी हम समझेंगे कि वे हमारे सच्चे हितैषी हैं।


एक अन्य किसान ने कहा कि यह तो किसानों को आगे बढ़ाकर अपने पैर खींचने वाली बात हो गई। हरियाणा से आए किसान पर¨वदर ने बताया कि हमें इस बात का विश्वास था कि दिल्ली में आंदोलन के दौरान राजनीतिक पार्टियों के बड़े नेता हमारा साथ देने आएंगे, लेकिन अभी तक कुछ ऐसा नहीं हुआ है। अब हमने उनसे उम्मीद भी छोड़ रखी है।