अप्रैंटिसशिप से कौशल विकास की तैयारी, मैन्यूफैक्चरिग, सेवा, ट्रेड, कॉमर्स और शिक्षण संस्थानों के लिए भी यह होगी अनिवार्य

0 38


नौकरी के दौरान प्रशिक्षण (अप्रैंटिसशिप) से बडे पैमाने पर देश के युवाओं का कौशल विकास होगा। अप्रैंटिसशिप के लिए सरकार कानून में बडे बदलाव की तैयारी में है। पहले सिर्फ मैन्यूफैक्चरिग तक सीमित अप्रैंटिसशिप का विस्तार सेवा क्षेत्र तक सरकार पहले ही कर चुकी है। अब ट्रेड और कॉमर्स को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

कौशल विकास मंत्री महेंद्रनाथ पांडेय के अनुसार, नए बदलावों से अप्रैंटिसशिप के लिए बेहतर इकोसिस्टम तैयार होगा और युवाओं को रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध होंगे। माना जा रहा है कि सभी बदलावों के बाद देश में एक समय में 20 लाख से अधिक युवा अप्रैंटिसशिप कर रहे होंगे।

वर्ष 2014 के पहले हर साल केवल 60–70 हजार युवा ही नौकरी के दौरान प्रशिक्षण ले रहे होते थे। वषर्ष 2014 में सेवा क्षेत्र को अप्रैंटिसशिप के दायरे में लाने के बाद उनकी संख्या बढी और पिछले वषर्ष 1.25 लाख युवाओं ने नौकरी करते हुए कौशल विकास का प्रशिक्षण लिया। कानून के मुताबिक 30 से अधिक कामगारों वाले उद्योगों के लिए कुल कामगारों के 2.5 फीसद युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रम में रखना अनिवार्य है।


कौशल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसका कभी कडाई से पालन नहीं किया गया। यहां तक कि उद्योग भी अप्रैंटिसशिप की जटिल और अनिवार्य कागजी खानापूर्ति की प्रक्रिया के कारण युवाओं को इस प्रक्रिया में शामिल करने से कतराते थे। अब सरकार कुल कामगार के 2.5 फीसद युवाओं को अप्रैंटिसशिप की अनिवार्यता का पालन सुनिश्चित करेगी, लेकिन साथ ही पूरी प्रक्रिया को इस तरह से सरल बनाया जाएगा कि यह उद्योगों के लिए बोझ बनने के बजाय सहयोगी बन सके।


वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक उद्योगों को अब अप्रैंटिसशिप में शामिल युवाओं के पंजीकरण और प्रशिक्षण दस्तावेज को संभालकर रखने की जरूरत नहीं प़़डेगी। इसके लिए थर्ड पार्टी एग्रीमेंट के तहत अन्य कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसी तरह, इस प्रक्रिया से गुजरने वाले युवाओं के लिए राष्ट्रीय अप्रैंटिसशिप सर्टिफिकेट परीक्षा में बैठने की अनिवार्यता खत्म कर दी जाएगी। अब यह परीक्षा साल में दो बार जरूर होगी, लेकिन छात्रों को इनमें बैठने या नहीं बैठने की छूट होगी।


इसके साथ ही उद्योगों को अप्रैंटिसशिप पूरा करने वाले युवाओं के कौशल की पहचान के लिए विशेषष परीक्षा आयोजित करने की छूट होगी। उद्योगों को अप्रैंटिसशिप के लिए संबंधित अधिकारियों से पूर्व मंजूरी की बाध्यता खत्म की जाएगी। मैन्यूफैक्चरिग और सेवा क्षेत्र के साथ ही ट्रेड, कॉमर्स, शैक्षिक व ट्रेनिग संस्थाओं को भी अप्रैंटिसशिप के दायरे में लाने के बाद बदले परिदृश्य के अनुसार इसकी शर्तो में भी बदलाव किया जाएगा।


अभी तक केवल उद्योगों को अपने परिसर में ही युवाओं को अप्रैंटिसशिप के लिए रखना होता था। अब उन्हें देश विदेश में स्थित किसी भी साइट पर प्रशिक्षण की छूट दी जाएगी। इसके साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को ऐसे कोर्स डिजाइन करने की छूट होगी, जिसमें औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ पार्ट टाइम अप्रैंटिसशिप भी शामिल हो।

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अप्रैंटिसशिप कानून में बदलाव के लिए सभी पक्षों के साथ व्यापक चर्चा की जा रही है। उसके बाद संशोधन के लिए विधेयक का मसौदा तैयार किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष के अंत तक इन बदलावों को अमल में ले आया जाएगा।